वंशावली विश्लेषण (Pedigree analysis)—मानव समुदाय में वंशागतिकी के अध्ययन हेतु इच्छानुसार संकरण नहीं कराया जा सकता इसके लिए इनमें वंशागतिकी के अध्ययन के लिए सम्बन्धित मनुष्य के कुल के इतिहास का अध्ययन कर वंशागतिकी लक्षणों को एकत्रित करके एक आरेख तैयार किया जाता है, जिसे वंश वृक्ष (Family tree) कहा जाता है तथा इस प्रकार किया गया अध्ययन वंशावली विश्लेषण कहलाता है। इसमें कुछ विशिष्ट चिन्हों का प्रयोग किया जाता है। इस वृक्ष में मादा को वृत
तथा नर को वर्ग (`square`) एवं विवाह को वर्ग `square` एवं वृत के बीच क्षैतिज रेखा

तथा

के द्वारा व्यक्त करते हैं। इस क्षैतिज रेखा से लटकती हुई समानान्तर रेखा से लटकते हुए वर्ग नर तथा वृत्त मादा सन्तान को व्यक्त करते हैं। यदि संतानों की संख्या ज्यादा हो, तो इन वर्गों तथा वृतों में सन्तानों की संख्या को लिख देते हैं। जिस लक्षण का अध्ययन किया जाता है, यदि वह किसी व्यक्ति में उपस्थित हो, तो उसके वर्ग या वत को भरा हुआ बनाते हैं तथा इसके वाहक या विषमयुग्मजी रूप म आध भरे वर्ग या वृत के द्वारा निरूपित किया जाता है। कल वक्ष में मरे हए व्यक्तियों के वर्ग या वृत में क्रॉस (X) का निशान लगा देते हैं। कुल वृक्ष के किसी व्यक्ति के फीनोटाइप में शंका होने पर खाने के सामने प्रश्नवाचक चिन्ह (?) लगा देते हैं। एक-समान जुड़वाँ बच्चों को
तथा असमान गुणों वाले जुड़वाँ बच्चों को
से व्यक्त करते हैं।
महत्व-वंशावली विश्लेषण से इस बात का पता लगाया जा सकता है कि पैदा होने वाली संतान किन गुणों वाली हो सकती है। यदि इसका उपयोग विवाह से पूर्व किया जाये तो कई विकृतियों से बचा जा सकता है। यह आनुवंशिक समस्याओं के समाधान में मदद करता है।