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BIOLOGY
मानव जीनोम परियोजना को महापरियोजना क्यों...

मानव जीनोम परियोजना को महापरियोजना क्यों कहा गया ?

लिखित उत्तर

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मानव जीनोम योजना (एच. जी. पी.) महायोजना (मेगा प्रोजेक्ट) कहलाती है। यदि इस योजना के उद्देश्यों पर ध्यान दें तो इसके विस्तार व आवश्यकता के बारे में कल्पना कर सकते हैं-
मानव जीनोम में लगभग `3xx10^(9)` क्षार युग्म मिलते हैं, यदि अनुक्रम जानने के लिए प्रति क्षार तीन अमेरिकन डॉलर (USS3) खर्च होते हैं तो पूरी योजना पर खर्च होने वाली लागत लगभग 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर होगा। प्राप्त अनुक्रमों को टंकणित रूप में किताब में संग्रहित किया जाए तो जिसके प्रत्येक पष्ठ में 1000 अक्षर हो तो इस प्रकार इस किताब में 1000 पृष्ठ होंगे तब इस तरह से एक मानव कोशिका के डीएनए सूचनाओं को संकलित करने हेतु 3300 किताबों की आवश्यकता होगी। इस प्रकार बड़ी संख्या में आँकड़ों की प्राप्ति के लिए उच्च गतिकीय संगणक साधन की आवश्यकता होती है जिससे ऑकड़ों के संग्रह,व पुन: विश्लेषण उपयोग में सहायता मिलती है। एचजीपी के बारे में जानकारी जीव विज्ञान के इस नए क्षेत्र का तेजी से विस्तार संभव हो पाया जिसे जैव सूचना विज्ञान (बायोइनफार्मेटिक्स) कहते हैं।
एच.जी.पी. के लक्ष्य -(1) मानव डीएनए में मिलने वाले एच.जी.पी. के कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्य निम्नलिखित हैं लगभग 20000-25000 सभी जीनों के बारे में पता लगाना,
(2) मानव डीएनए को बनाने वाले 3 बिलियन रासायनिक क्षार युग्मों के अनुक्रमों को निर्धारित करना।
(3) उपरोक्त जानकारी को आँकड़ों के रूप में संगृहीत करना
(4) आकड़ों के विश्लेषण हेतु नयी तकनीक का सुधार करना,
(5) योजना द्वारा उठने वाले नैतिक कानूनी सामाजिक मुद्दों (इ. एल. एस. आई.) के बारे में विचार करना।
मानव जीनोम परियोजना 13 वर्ष की योजना को जिसे अमेरिका ऊर्जा विभाग (यू एस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी) व राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ) द्वारा सहयोग प्राप्त था। प्रारंभिक वर्षों में वेलकम न्यास (यू.के.) की एचजीपी में भागीदारी थी और बाद में जापान, फ्रांस, जर्मनी, चीन व अन्य देशों द्वारा सहयोग प्रदान किया गया। यह योजना 2003 में पूर्ण हो गई। विभिन्न व्यक्तियों में मिलने वाले डीएनए की विभिन्नता के बारे में प्राप्त जानकारी से मानव में मिलने वाले हजारों अनियमितताओं के बारे में पहचानने, उपचार करने व कुछ हद तक उनके रोकने में सहायता मिली है। इसके अतिरिक्त, मानव जीव विज्ञान के सुरागों को समझने, अमानवीय जीवों के डीएनए अनुक्रमों की प्राप्त जानकारी के आधार पर उनकी प्राकृतिक क्षमताओं का उपयोग कर स्वास्थ्य सुरक्षा, कृषि, ऊर्जा उत्पादन व पर्यावरण सुधार की दिशा में उठने वाली चुनौतियों को हल किया जा सकता है। कई अमानवीय प्रतिरूप-जीवों जैसे-जीवाणु, यीस्ट, केएनोरहेब्डीटीस इलीगेंस (स्वतंत्र अरागजनक सूत्रकृमि), ड्रोसोफिला (फलमक्खी), पौधा (धान व एरेबीडाप्सीस) आदि के अनुक्रमों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है।
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