इस प्रमेयानुसार, "किसी समतल पटल व उसके तल के लंबवत् अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण उसी के तल में स्थित दो लंबवत् अक्षों के परितः जड़त्व आघूर्णों के योग के बराबर होता है। ये दोनों अक्ष एक-दूसरे को उस बिन्दु पर काटते हैं, जिसमें से होकर लंब अक्ष गुजरता है।"
अर्थात् यदि X-अक्ष के परितः पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण `I_x` , Y- अक्ष के परितः `I_y` , तथा Z-अक्ष के परितः `I_z` हो तो `I_z = I_x + I_y`
उपपत्ति-माना समतल पटल पर m द्रव्यमान का कोई कण P है, जिसकी X,Y तथा Z अक्षों से दरियाँ क्रमशःx, y तथा r हैं, तब P का X - अक्ष के परित: जड़त्व आघूर्ण = `my^2`
तब संपूर्ण पटल का X-अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण
` I_x = Sigma my^2 " " ....(1)`
इसी प्रकार, पटल का Y-अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण
` I_y = Sigma mx^2 " " ...(2)`
एवं संपूर्ण पटल का Z-अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण
` I_z = Sigma mr^2 " " ...(3)`
किन्तु समकोण `trianglePMO` में,
` OP^2 = PM^2 + OM^2`
`r^2 =x^2 + y^2`
`mr^2 = mx^2 + my^2`
`Sigma mr^2 = Sigmamx^2 + Sigmamy^2`
समी. (1), (2) तथा (3) से मान रखने पर,
`I_z = I_y + I_x`
`therefore I_z = I_x + I_y` यही लंब अक्ष प्रमेय है।