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CHEMISTRY
समझाइए कि कैसे लोहे पर जंग लगने का कारण ...

समझाइए कि कैसे लोहे पर जंग लगने का कारण एक विद्युत् रासायनिक सेल बनना माना जाता है ?

लिखित उत्तर

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संक्षारण या लोहे पर जंग लगना एक विद्युत् रासायनिक प्रक्रम है। यहाँ,
ऐनोड = आयरन पृष्ठ
कैथोड = अशुद्ध आयरन पृष्ठ
विद्युत् अपघट्य = जल की बूंद जिसमें `CO_(2) तथा O_(2)` विलेय हैं।
ऐनोड पर अभिक्रिया (Reactions on Anode)- आयरन ऑक्सीकृत होकर `Fe^(2+)` आयन बनाता है तथा इलेक्ट्रॉन कैथोड पर चले जाते हैं।
`Fe(s) rarr Fe^(2+)(aq) + 2e^(-)`
कैथोड पर अभिक्रिया (Reactions on Cathode)- यहाँ ऐनोड से आये इलेक्ट्रॉनों को H+ ग्रहण कर लेता है और `CO_(2) के साथ H_(2)CO_(3)` बनाता है।
`H_(2)O + CO_(2)(g) hArr H_(2)CO_(3)`
`H_(2)CO_(3) hArr H^(+) + HCO_(3)^(-)`
`2H^(+) + 2e^(-) rarr 2H^(+)`
ये H-परमाणु ऑक्सीजन से क्रिया करके जल बना लेते हैं।
`2H^(+) + 1/2O_(2) rarr H_(2)O`
अतः कैथोड पर अभिक्रिया `2H^(+) + 1/2O_(2) + 2e^(-) hArr H_(2)O`
जंग लगने के दौरान लोहे की सतह पर बने विद्युत्- रासायनिक सेल में होने वाली पूर्ण या समग्न अभिक्रिया निम्न प्रकार है
`2Fe + 4H^(+) +O_(2) rarr 2Fe^(2+) + 2H_(2)O`
फेरस आयन पुनः वायुमण्डलीय ऑक्सीजन द्वारा फेरिक आयनों में ऑक्सीकृत हो जाते हैं जिसके कारण लोहे पर जंग लगती है।
`2Fe^(2+) + 1/2O_(2) + 2H_(2)O rarr Fe_(2)O_(3) + 4H^(+)`
`Fe_(2)O_(3) + xH_(2)O rarr Fe_(2)O_(3).xH_(2)Ounderset(“जंग (जलयोजित फेरिक ऑक्साइड)”)`
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