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CHEMISTRY
दर्पण अप्रतिबिम्ब विवरिम या अप्रतिबिम्ब ...

 दर्पण अप्रतिबिम्ब विवरिम या अप्रतिबिम्ब समावयवता को उदाहरण सहित समझाइये।

लिखित उत्तर

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वे प्रकाशिक समावयी यौगिक जो एक दूसरे के दर्पण प्रतिबिम्ब नहीं होते हैं, अप्रतिबिम्ब समावयवी कहलाते हैं। इनको विविरम समावयवी भी कहा जाता है। यह परिघटना विवरिम समावयवता कहलाती है।
इनके गुण निम्न प्रकार से है।
(i) ये एक-दूसरे पर अध्यारोपित नहीं किये जा सकते हैं
(ii) विवरिम समावयवता केवल उन्हीं यौगिकों में ही पायी जाती हैं जिनमें कम से कम दो किरैल कार्बन केन्द्र उपस्थित हों।
(iii) किसी भी योगिकों के अप्रतिबिम्ब या विवरिम समावयवियों के भौतिक गुणधर्म जैसे-गलनांक, क्वथनांक, विलेयता, विशिष्ट घूर्णन इत्यादि भिन्न-भिन्न होते हैं। अतः इन्हें आसानी से प्रभाजी आसवन, प्रभाजी क्रिस्टलन तथा क्रोमेटोग्राफिक विधियों के द्वारा पृथक किया जा सकता है।यहाँ पर और (ID.CD और (IV),(ID) और (m) और (ID) तथा (ID) और (IV) आपस में विवरिम समावयवी है। यहाँ इनके भोतिक गुणों में भिन्नता है।
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