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Class 12
PHYSICS
एक धन-आवेशित पतली धातु की वलय जिसकी त्रि...

एक धन-आवेशित पतली धातु की वलय जिसकी त्रिज्या R है, x-y तल में स्थित है तथा इसका केन्द्र मूल बिन्दु् O पर है। एक ऋण आवेशित कण P बिन्दु `(0, 0, z_(0))` से विरामावस्था से छोड़ा जाता है, जहाँ `z_(0) gt 0`, तब P की गति है।

A

आवती, प्रतिबन्ध `0 lt z_(0) lt oo` के अन्तर्गत के सभी मानों के लिए

B

सरल आवर्त, प्रतिबन्ध `0 lt z_(0) le R` के अन्तर्गत के सभी मानों के लिए

C

लगभग सरल आवर्त बशर्तें कि `z_(0) lt lt R`

D

P को गति इस प्रकार की है कि P मूल बिन्दु को पार करके ऋणात्मक -अक्ष के अनुदिश `z=-oo` को और लगातार चलता जाता है।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
A, C

माना वाले पर आवेश Q है तथा बिंदु `P(0,0,z(0))` से आवेश `-q_(0)` छोड़ा जाता है आवेशित वाले के कारन P पर विघुत क्षेत्र धन x-अक्ष के अनुदिश होगा तथा उसका परिणाम निम्न होगा
`E=(1)/(4pi epsi_(0)) (Qz_(0))/((R^(2)+z_(0)^(2))^(3//2))`
चूँकि z= 0, इसलिए वलय के केन्द्र पर E अत: आवेश P पर बल चित्रानुसार केन्द्र की ओर होगा जिसका परिमाण,
`F_(e)=qE =(1)/(4pi epsi_(0)) . (Qq)/((R^(2)+z_(0)^(2))^(3//2)) .z_(0) .........(i)`
इसी प्रकार जब यह मूल बिन्दु को पार करता है तब भी बल की दिशा केन्द्र O की ओर होती है। अत: कण की गति `z_(0)` के `(0" से "oo" तक")` सभी मानों के लिए आवर्ती होगी।
यदि `z_(0) lt lt R, (R^(2)+z_(0)^(2))^(3//2)=R^(3)`
`F_(e)=(1)/(4pi epsi_(0)). (Qq)/R^(3).z_(0) " [समी (i) से]"`
अर्थात् प्रत्यानयन बल F_(e) alpha -z_(0) |` अत: क्ण की गति सरल आवर्त होगी (ऋण चिन्ह बल की दिशा सदैव केन्द्र की ओर बताता है)।
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