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Class 10
PHYSICS
पृथ्वी की आन्तरिक संरचना को समझाइए। नामा...

पृथ्वी की आन्तरिक संरचना को समझाइए। नामांकित चित्र भी बनाइए। 

लिखित उत्तर

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पृथ्वी की संरचना परतों के (प्याज के छिलकों की भाँति) रूप में है। पृथ्वी के केन्द्र से सतह की दूरी लगभग 3900 कि.मी. है। पृथ्वी तीन प्रकार की परतों से बनी होती है। इन परतों की मोटाई का सीमांकन रासायनिक व यांत्रिक विशेषताओं के आधार पर किया जाता है।
(1) ऊपरी परत-पृथ्वी की सबसे ऊपरी पर्त ठोस भूपर्पटी होती है। इसे पृथ्वी की त्वचा भी कहा जा सकता है। इसकी मोटाई सभी स्थानों पर एक समान नहीं होती है। इसी अन्तर के कारण कहीं पर पहाड़ तो कहीं समुद्र होते हैं । इस भूतल को दो भागों जलमण्डल व स्थलमण्डल में विभक्त कर सकते हैं। स्थलमण्डल का अधिकांश भाग मिट्टी से बना होता है। जल, थल व वायुमण्डल का वह भाग जिसमें जीवन पाया जाता है उसे जैवमण्डल कहते हैं। पृथ्वी के अतिरिक्त अन्य किसी ग्रह पर जैवमण्डल अभी तक नहीं पाया गया है। भूपर्पटी का 70 प्रतिशत भाग जल से ढका है, जो समतल होता है। शेष 30 प्रतिशत भाग स्थल है, जिस पर कहीं मैदान तो कहीं पर्वत व घाटियाँ व कहीं मरुस्थल होता है।
पृथ्वी के ठण्डे होने के साथ भूपर्पटी विशाल चट्टान खण्डों में बदल गई। इन -विशाल चट्टानों खण्डों को विवर्तनिक प्लेटें कहते हैं। नाविवर्तनिक प्लेटों पर ही महाद्वीप स्थित हैं। ये प्लेटें धीरे धीरे खिसकती रहती हैं । पृथ्वी की सतह पर 29 विवर्तनिक प्लेटें हैं तथा इनकी गति बहुत ही धीमी हैं।
(2) द्वितीय परत पृथ्वी की द्वितीय पर्त को मेंटल कहते हैं। इसका निर्माण पिघली चट्टानों से हुआ है। इन सिलिकेट चट्टानों में लोहे व मैग्नेशियम की मात्रा भूपर्पटी की तुलना में अधिक होती है, इसमें बुलबुले उठते रहते हैं। मेंटल पृथ्वी के मध्य भाग पर ऊपर-नीचे होती रहती है।
(3) केन्द्रीय भाग-पृथ्वी का केन्द्रीय भाग क्रोड होता है, जो सबसे गहरा होने के कारण अधिक गर्म होता है (`7000^(@)`C तापमान)। क्रोड के गर्म होने का कारण पृथ्वी के बनते समय अन्दर रह गई ऊष्मा है । क्रोड के भी दो भाग होते हैं। अन्दर का क्रोड ठोस व शुद्ध लोहे का बना होता है। इसमें सोने व प्लेटिनियम होने की सम्भावना भी बताई गई है। बाहरी क्रोड तरल व मुख्य रूप से इसमें निकिल व लोहा होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि क्रोड स्थिर नहीं होता वरन् पृथ्वी से भी तेज गति से चक्कर लगाता रहता है। क्रोड ही पृथ्वी का सबसे सघन भाग है व पृथ्वी के चुम्बकत्व का कारण भी क्रोड है। पृथ्वी की रासायनिक संरचना उल्काओं के समान होने के कारण इसे बड़ी उल्का भी कहा जाता है।
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