जापान, कनाडा, रूस, अमेरिका व यूरोपियन स्पेस एजेन्सी की भागीदारी से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया है | वर्तमान में चीन भी अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने के लिए प्रयास कर रहा है | यह पृथ्वी की कक्षा में उपस्थित सबसे बड़ी कृत्रिम संरचना है | यह स्टेशन बिना किसी दूरदर्शी यंत्र के सूर्योदय से पूर्व व सूर्यास्त के बाद श्वेत गतिशील बिंदु के रूप में दिखाई देता है | वृत्ताकार पथ पर यह पृथ्वी से 330 से 435 किलोमीटर की दूरी बनाए रखता है व एक दिन में पृथ्वी के 15 से अधिक चक्कर लगा लेता है |
इस स्टेशन पर अनेक कक्ष है जिनमे रहने के लिए व प्रयोगशालाएँ है | यहाँ बागवानी भी की जाती है | ऊर्जा का उत्पादन सौर पैनलों द्वारा होता है | कमरों में वायुमण्डलीय दाब पर हवा भरी होती है, जिससे अंतरिक्ष यात्री बिना अंतरिक्ष सूट पहने आराम से कई महीने रहकर कार्य कर सकते है परन्तु बाहर आने पर उन्हें अंतरिक्ष सूट पहनना पड़ता है |इस स्टेशन को बनाने वाले घटकों को पृथ्वी पर बनाकर रुसी व अमेरीकी रॉकेटों की सहायता से अंतरिक्ष में भेजा गया है जहाँ अंतरिक्ष में उन्हें जोड़-जोड़कर यह रूप दिया गया | पुराने व खराब भागों को समय-समय पर बदला जाता है |
पृथ्वी के नजदीक होने के कारण स्टेशन पर गुरुत्व बल होता है किन्तु कक्षीय गति के कारण यान स्वतंत्रतापूर्वक गिरती वस्तु की तरह होता है | स्वतंत्रतापूर्वक गिरती वस्तु भारहीनता की स्थिति में होने के कारण यह अंतरिक्ष में टिक पाती है | नवंबर 2000 से यह स्टेशन है, जिस पर यात्री जाते व आते रहते है | भारतीय मूल की अमेरिकन नागरिक सुनिता विलियम्स एक से अधिक बार कार्य से आ-जा चुकी है | विलियम्स अपने साथ गीता, गणेश की मूर्ति व कुछ समोसे भी लेकर गई थी | यहाँ पर चयनित यात्री विशेष उद्देश्य की लिए ही जाते है | रूस के अंतरिक्ष यान सोयूज में एक सीट खाली रहती है | इस सीट का किराया चुकाकर वह यात्री जा सकता है | वहाँ के यात्री रेडियो, टेलीविज़न, इंटरनेट के माध्यम से पृथ्वी के कार्यक्रमों से जुड़े रहते है तथा वार्ता भी कर सकते है | अंतरिक्ष यात्री समय-समय पर अपने परिवार के सदस्यों से भी बात करते रहते है |
इनका भोजन प्लास्टिक थैलियों में भेजा जाता है | पेय पदार्थों को स्ट्रा की सहायता से ही मुँह में खींचना होता है, खाने की चीज़ो को चिमटी से खाना पड़ता है व चिमटी को ट्रे में रखने के लिए चुंबक का प्रयोग करते है वरना वह हवा में तैरने लगती है | यधपि लम्बे समय तक अंतरिक्ष में रहने पर स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है अतः कुछ समय पश्चात पुनः पृथ्वी पर आ जाते है | पृथ्वी के पास अंतरिक्ष में अधिक कचरा एकत्रित (कार्य में आ चुके रॉकेट, उनके निष्क्रिय भाग, कृत्रिम उपग्रह को निष्क्रिय करने के लिए छोड़े गये हथियार, प्राकृतिक सूक्ष्म उल्का पिण्ड) हो गया है | इससे अंतरिक्ष स्टेशन से टकराने का खतरा है | अंतरिक्ष में चक्कर लगाते पिण्डो की तेज गति के कारण छोटे से टुकड़े की टक्कर बड़ा नुकसान कर सकती है |