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PHYSICS
हिमनद व समुद्री धाराओं का वर्णन कीजिए।...

 हिमनद व समुद्री धाराओं का वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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हिमनद (Glaciers)-ठण्डे क्षेत्रों में वर्षा हिमकणों के रूप में होती है, जिसे हिमपात कहते हैं। प्रायः हिमालय जैसे ऊँचे पर्वतों तथा ध्रुवीय क्षेत्रों में हिमपात की स्थिति बनी रहती है। हिमपात के कारण उन क्षेत्रों में बर्फ मोटी परतों में जमी रहती है, किन्तु बाद में गुरुत्वाकर्षण बल के कारण बर्फ की पूरी की पूरी पर्त धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकने लगती है। बर्फ की परतों के बहने को हिमनद या ग्लेशियर कहते हैं। ये बर्फ की शिलाएँ विशाल आकार की होने से इनमें अधिक शक्ति होती है व जो भी मार्ग में बाधा आती है, उसके टुकड़े कर देती है। गंगा व यमुना हिमनदी से निकलने वाली नदियाँ हैं। वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग के कारण पर्वतों व ध्रुवों की बर्फ पिघलती जा रही है तथा पिघला जल समुद्र के तल को बढ़ा रहा है जिसके कारण समुद्र के आसपास के नगर जल में डूबने की स्थिति में हैं। भारत का ही द्वारका शहर अनेक बार जल में डूब चुका है व हर बार नया बसाया जाता रहा है।
समुद्री धाराएँ (Oceanic Currents)-विश्व में सबसे अधिक जल की मात्रा समुद्र में होती है और इसी कारण समुद्र विशाल दिखते हैं। प्रायः समुद्र शान्त होते हैं क्योंकि इनमें बाढ़ व सूखे की स्थिति देखने को नहीं मिलती परन्तु गहराई में देखने पर समुद्री जल में शक्ति देखने को मिलती है। वायु के प्रभाव से समुद्र जल की लहरें ऊपर-नीचे होती रहती हैं। ये समुद्र की लहरें भूकम्प या ज्वालामुखी फूटने या तूफान आने पर घातक हो जाती हैं। इन समुद्री लहरों को समुद्र में बहने वाली नदी भी कहते हैं।
इन समुद्री लहरों में एक निश्चित दिशा में जल निरन्तर बहता रहता है। कहीं समुद्री धाराओं में गर्म जल बहता है तो कहीं ठण्डा जल बहता है। तापक्रम अन्तर व घनत्व अन्तर के कारण समुद्री धारायें बहती हैं। इन धाराओं का मानव जीवन पर प्रभाव पड़ता है। गर्म धाराएँ क्षेत्र को गर्म तो ठण्डी धाराएँ शीतल कर देती हैं। गर्म धाराओं पर से गुजरने वाली हवाएँ अपने साथ बहुत नमी ले जाती हैं जो ऊँचे स्थानों पर वर्षा का कारण होता है। जिन स्थानों पर गर्म व ठण्डी धाराएं मिलती हैं वहाँ बहुत तापान्तर पैदा होता है जो हरीकेन व टाईफून जैसे तूफानों को जन्म देता है। जहाजों के संचालन व समुद्री जीवों के जीवन पर धाराओं का प्रभाव पड़ता है।
ज्वार-भाटे के रूप में भी समुद्र जल में बड़ी मात्रा में शक्ति का संचार होता है। ज्वार-भाटा सूर्य व चन्द्रमा के एक सीध में होने पर होता है। ऐसा होने पर समुद्री जल पर गुरुत्वाकर्षण बल बहुत बढ़ जाता है। इसके खिंचाव के कारण ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है।
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