पृथ्वी की आंतरिक संरचना शल्कीय अर्थात् परतों के रूप में हैं जैसे प्याज के छिलके परतों के रूप में होते हैं । इन परतों की मोटाई का सीमांकन रासायनिक विशेषताओं अथवा यांत्रिक विशेषताओं के आधार पर किया जा सकता है। पृथ्वी की ऊपरी परत भूपर्पटी एक ठोस परत है, मध्यवर्ती मेंटल अत्यधिक गाढ़ी परत है और बाहरी क्रोड तरल तथा आंतरिक क्रोड ठोस अवस्था में है।
पृथ्वी के ठंडे होने के साथ ही भूपर्पटी विशाल चट्टान खण्डों में बदल गई । इन विशाल चट्टान खण्डों को विवर्तनिक प्लेटें कहते हैं। महाद्वीप इन्हीं विवर्तनिक प्लेटों पर स्थित है। विवर्तनिक प्लेटें धीरे धीरे खिसकती रहती हैं । इनके खिसकने की गति हमारे नाखूनों के बढ़ने की गति के बराबर आंकी गई हैं। प्रारम्भ में जब विवर्तनिक प्लेटें हल्की थी इनकी गति कुछ तेज थी। अब गति कम है। पृथ्वी की सतह पर 29 विवर्तनिक प्लेटें पायी जाती हैं। पृथ्वी की आंतरिक रचना पृथ्वी की रासायनिक संरचना उल्काओं के समान है अत: पृथ्वी को भी एक बड़ी उल्का कहा जा सकता है।
