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PHYSICS
विदेशी प्रजातियों के आक्रमण का जैव-विविध...

विदेशी प्रजातियों के आक्रमण का जैव-विविधता पर क्या प्रभाव होता है ?

लिखित उत्तर

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यह देखा गया है कि विदेशी प्रजातियों के आने से स्थानीय प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है तथा यह सम्पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन उत्पन्न कर देते हैं। जैसे कुछ पादप प्रजातियों को सौंदर्यीकरण के लिए हमारे देश में लाया गया , उदा ,लैंटाना तथा जलकुम्भी । वस्तुतः लैंटाना को अंग्रेज 1807 में भारत लाये तथा इसे कोलकाता के वनस्पति उद्यान में लगाया था किन्तु यह पादप धीरे-धीरे समूचे उपमहाद्वीप में फैल गया। आज यह पौधा स्थानीय जैवविविधता के लिए संकट बना है क्योंकि यह आसपास अन्य पौधों को उगने नहीं दता व न हो इस जानवर खाते हैं। इसी प्रकार जलकुम्भी को भी ब्राज़ील से लाया गया जो वर्तमान में भारत के सभी जलस्त्रों मानीं फैल चुकी है।
जलकुम्भी के अनियंत्रित विस्तार से यह सूर्य के प्रकाश को रोककर जल में विद्यमान सभी पौधों को नष्ट कर देती है तथा अन्य जलीय जीवों को ऑक्सीजन कम मिलने से वे मरने लगते हैं। अमेरिका से आयतित किये गये गेहूँ में आई गाजर घास (Parthenium ) भी इसका उदाहरण है। यह 1950 में अमेरिका से आयात किये गये गेहूँ के साथ भारत में आई। गाजर घास विश्व के सबसे खतरनाक खरपतवारों में से एक है। इसे जानवर तक नहीं खाते हैं। इसमें अनेक ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो मानव में एलर्जी रोग उत्पन्न करते हैं। यह भी स्थानीय जैवविविधता के लिए भारी संकट है।
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