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अंगदान क्या है? अंगदान का महत्व बताइए।...

अंगदान क्या है? अंगदान का महत्व बताइए।

लिखित उत्तर

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अंगदान- जीवित या मृत व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को कोई ऊतक या अंग दान करना अंगदान कहलाता है। दाता द्वारा दान किया गया अंग ग्राही के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस तरह अंगदान से दूसरे व्यक्ति की ज़िंदगी को ना केवल बचाया जा सकता है वरन खुशहाल भी बनाया जाता है। अधिकांश अंगदान दाता की मृत्यु के पश्चात ही होते है।
एक मृत देह से करीब पचास जरूरतमंद लोगो की मदद की जा सकती है। अतः अंगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। बच्चो से लेकर नब्बे वर्ष तक के लोग भी अंगदान व देहदान में सक्षम है।
अंगदान का महत्व- ..पशु मरे मनुज के सौ काम संवारे, मनुज मरे किसी के काम ना आवे। ..अतः आवश्यकता है कि मानव मृत्यु के बाद प्राणिमात्र के काम आ सकते। यह तभी सम्भव है जब मृत्यु उपरान्त भी हम दूसरे व्यक्तियों में जीवित रहे, हमारी आँखे, गुर्दे, यकृत, अग्न्याशय, ह्रदय, फेफड़े, अस्थिमज्जा, त्वचा आदि हमारी मृत्यु के पश्चात भी किसी जरूरतमंद के जीवन में सुख ला पाए तो इस दान को सात्विक श्रेणी का दान कहा जाता है।
भारत में हर वर्ष करीब पाँच लाख लोग अंगो के खराब होने तथा अंग प्रत्यारोपण ना हो पाने के कारण मृत्यु को प्राप्त हो जाते है। अंगदान की भाँति देहदान भी समाज के लिए महत्वपूर्ण है। इसके दो कारण है- पहला, मृत देह से अंग निकालकर रोगी व्यक्तियों के शरीर में प्रत्यारोपण किये जा सकते है। दूसरे, चिकित्सकीय शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र, मृत देह पर प्रशिक्षण प्राप्त कर बेहतरीन चिकित्सक बन संके।
हम अंगदान व देहदान के महत्व को समझे और उन लोगो की मदद करें जिनका जीवन किसी अंग के अभाव में बड़ा कष्टप्रद है। हमे इस नेक कार्य के लिए आगे आकर समाज को इस श्रेष्ठ मानवीय कार्य के लिए प्रेरित करना चाहिए। इस पवित्र कार्य हेतु शिक्षक, साधु-संत, बुद्धिजीवियों आदि की मदद से समाज में व्याप्त अंधविश्वास को दूर कर अंगदान करने के लाभ लोगो तक पहुँचना अति आवश्यकता है। इस प्रयोजन से भारत सरकार हर वर्ष 13 अगस्त का दिन अंगदान दिवस के रूप में मनाती है।
समाज के कई प्रतिष्ठित व्यक्ति इस नेक काम के लिए आगे आये है। कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने 90 वर्ष की उम्र में अपना कार्नियां दान कर दो लोगो के जीवन में उजाला कर दिया। इसी प्रकार डॉ. विष्णु प्रभाकर, पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री श्री ज्योति बसु एवं श्री नाना देशमुख आदि की भी उनकी इच्छानुसार मृत्यु पश्चात देह दान कर दी गई।
साध्वी ऋतम्भरा तथा क्रिकेटर गौतम गम्भीर ने भी मृत्यु के बाद देहदान करने की घोषणा की है। ऐसे मनुष्य सही मायनो में महात्मा है तथा ये ही विचार क्रांति के ध्वजक है। हम सभी को कर्तव्यबोध के साथ रक्तदान, अंगदान तथा देहदान के लिए संकल्पित होना चाहिए ताकि इस पुनीत कार्य से हमारे समाज में रह रहे हमारे साथी जिंदगी को जिंदगी की तरह जी सके।
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