स्पेस तरंग संचरण में प्रसारण दूरी व एन्टेना की ऊँचाई में संबंध- तरंग संचरण की इस विधि में तरंगें क्षोभमण्डल में गति करती हुई, सीधे प्रेषित्र से अभिग्राही तक पहुँचती हैं। क्षोभमण्डल, वायुमण्डल की वह परत होती है जिसका विस्तार पृथ्वी की सतह से लगभग 12 किमी. की ऊँचाई तक होता है। यदि हमको प्रसारण इस विधि में अधिक दूरी तक लेना हो तो प्रेषित ऐन्टेना की ऊँचाई अधिक लेनी पड़ती है। प्रसारण दूरी एवं ऐन्टेना की ऊँचाई में संबंध निम्न प्रकार से ज्ञात करते हैं-
चित्र के अनुसार Q एक ऐन्टेना है, जिसकी पृथ्वी की . सतह से ऊँचाई h है। इस स्थिति में ऐन्टेना से SR दूरी में । प्रसारण सम्भव हो सकता है। समकोण त्रिभुज OQR के । अनुसार
`OQ^(2)=(OR)^(2)+(QR)^(3)`
या `" "(R+h)^(2)=R^(2)+d^(2)`
या `" "R^(2)+2Rh+h^(2)=R^(2)+d^(2)`
या `" "h(h+2R)=d^(2)`
यदि `h lt lt R` हो तो `h+2R~~2R` एवं `QR=d~~PR` होगा | यहाँ R पृथ्वी की त्रिज्या हैं |
अत: `d=sqrt(2Rh)" "...(1)`
समीकरण (1) से स्पष्ट है कि अधिक दूरी तक प्रसारण के लिए ऐन्टेना की ऊँचाई अधिक लेनी होगी। इस विधि से 100-20 MHz की आवृत्तियों का संचरण होता है।