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BIOLOGY
मेण्डल के आनुवांशिकता के नियमों के महत्त...

मेण्डल के आनुवांशिकता के नियमों के महत्त्व लिखिए।

लिखित उत्तर

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मेण्डल के आनुवंशिकता के नियमों का महत्त्व निम्न है -
(1) सजीवों में प्रभाविता के लक्षण का पाय जाना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अनेक हानिकारक एवं घातक जीन अप्रभावी होने के कारन प्रभावी जीन की उपस्थिति में अपने आपको अभिव्यक्त नहीं कर पाते हैं।
(2) मेण्डल के नियमों से संकर सन्तति में उप्तन्न नये लक्षणों के बारे में पता चलता है।
(3) मेण्डल के नियमों के उपयोग से रोग प्रतिरोधक तथा अधिक उप्तादन वाले फसली पौधों की किस्में विकसित की जा सकती हैं।
(4) मानव जाति के सुधार सम्बन्धित विज्ञान की शाखा सुजननिकी मेण्डलीय नियमों पर ही आधारित है।
(5) संकरण विधि से अनुपयोगी लक्षणों को हटाया जा सकता है तथा उपयोगी लक्षणों को एक साथ एक ही जाति में लाया जा सकता है।
(6) मेण्डल के पृथक्करण के नियम को प्रस्तुति से जीन संकल्पना की पुष्टि होती है।
(7) पृथक्करण के नियमानुसार एक जीन के दो युग्मविकल्पी होते हैं तथा वे दो विपर्यासी लक्षणों को नियंत्रित करते हैं।
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  1. यदि मटर के गोल बीज वाले लम्बे पौधों का संकरण (क्रॉस) शुर्रीदार बीज वाल...

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  2. लक्षण प्रारूप व जीन प्रारूप में अन्तर लिखिए।

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  3. मेण्डल की सफलता के कारण लिखिए।

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  4. द्विसंकरण संकरण को समझाइए।

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  5. मेण्डल के आनुवांशिकता के नियमों के महत्त्व लिखिए।

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  6. बाह्य संकरण व परीक्षण संकरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए -

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  7. पनेट वर्ग से आप क्या समझते हैं ?

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  8. समयुग्मजी व विषमयुग्मजी में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

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  9. मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे को ही क्यों चुना?

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  10. मटर के लम्बे (प्रभावी) एवं बौने (अप्रभावी) लक्षणों वाले पौधों में संकर...

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