प्रतिरक्षियों की संरचना-प्रतिरक्षी का आकार अंग्रेजी के .Y. अक्षर की तरह होता है । यह चार संरचनात्मक इकाइयों से मिलकर निर्मित होती है । इनमें दो भारी व बड़ी [H] तथा दो हल्की व छोटी [L] पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ होती हैं । एक भारी व एक हल्की श्रृंखला मिलकर HL द्विलक निर्मित करती है। दो द्विलक मिलकर एक प्रतिरक्षी का निर्माण करते हैं अर्थात् एक प्रतिरक्षी आयु दो समरूपी अर्धांशों से मिलकर बना होता है। दोनों अर्धाश आपस में डाइसल्फाइड बंध से संयोजित होते हैं । प्रत्येक अर्धांश एक H व एक Lपॉलिपेप्टाइड शृंखला से मिलकर बना होता है। प्रत्येक अर्धांश में पाये ज़ाने वाली H तथा L श्रृंखलाओं को भी डाइसल्फाइड बंध परस्पर संयोजित करता है। प्रत्येक भारी श्रृंखला 440 अमीनो अम्लों से तथा प्रत्येक हल्की श्रृंखला 220 अमीनो अम्लों से बनी होती है। भारी पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला पर कार्बोहाइ ड्रेट श्रृंखला जुड़ी होती है। प्रत्येक भारी व हल्की श्रृंखला दो भागों में विभाजित होती है-(i) अस्थिर भाग-यह भाग प्रतिजन से क्रिया करता है तथा श्रृंखला के NH, अंश की तरफ पाया जाता है। इसे F भाग कहते हैं। (ii) स्थिर भाग-यह भाग श्रृंखला के COOH अंश की तरफ होता हैं तथा F. भाग कहलाता है। अधिकतर प्रतिरक्षियों के .Y. स्वरूप में दोनों भुजाओं के उद्गम स्थल लचीले होते हैं तथा कब्जे अथवा हिन्ज कहलाते हैं।
