रक्ताधान की प्रक्रिया-रक्ताधान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसे निम्न प्रकार से संपादित किया जाता है- (1) रक्त संग्रहण (Blood collcction)- (i) रक्त संग्रहण प्रक्रिया से पूर्व दाता के स्वास्थ्य का परीक्षण किया जाता है । (ii) स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उपयुक्त क्षमता वाली प्रवेशनी के माध्यम से विशेष प्रकार की निर्जरमीकृत थक्कारोधी युक्त थैलियों में दाता से रक्त संग्रहण किया जाता है। (iii) संग्रहीत रक्त का प्रशीतित भंडारण किया जाता है। इससे रक्त में जीवाणु वृद्धि को रोका तथा कोशिकीय यथापचय को धीमा किया जाता है। (iv) संग्रहीत रक्त की कई प्रकार की जाँच की जाती है। जैसे रक्त समूह, आर.एच.कारक, हेपैटाइटिस बी, हेपैटाइटिस सी, एच. आई. वी. आदि । (v) रक्तदान संग्रहण के बाद दाता को कुछ समय तक चिकित्सक की निगरानी में रखा जाता है ताकि उसके शरीर में रक्तदान के कारण होने वाली किसी प्रतिक्रिया का उपचार किया जा सके। (2) आधान (Transfusion)- (i) आधान से पूर्व मरीज के रक्त दाता के रक्त से मिलान (ABO, Rh आदि) किया जाता है । इस प्रक्रिया के बाद ही आधान संपादित किया जाता है। (ii) संग्रहीत रक्त को आधान प्रक्रिया प्रारम्भ करने से केवल 30 मिनट पूर्व ही भंडारण क्षेत्र से बाहर लाया जाता है। (iii) रक्त केवल अंत:शिरात्मक रूप से दिया जाता है। यह करीब 4 घंटों तक चलने वाली प्रक्रिया है जो प्रवेशनी के माध्यम से सम्पन्न की जाती है। (iv) रोगी में आधान सम्बन्धित प्रतिक्रियाओं जैसे ज्वर, ठंड लगना, दर्द, साइनीसिस, हृदय गति की अनियमितता आदि को रोकने हेतु चिकित्सक द्वारा औषधियाँ दी जाती हैं। दान किए हुए रक्त को प्रसंस्करण द्वारा अलग-अलग भी किया जा सकता है। प्रसंस्करण के पश्चात् रक्त को लाल रक्त कोशिकाओं, प्लाज्मा तथा बिंबाणुओं में विभक्त कर प्रशीतित भंडारण किया जाता है।