Home
Class 10
BIOLOGY
गर्भ रक्ताणुकोरकता को समझाइए।...

गर्भ रक्ताणुकोरकता को समझाइए।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

गर्भावस्था के दौरान यदि माँ का आर एच ऋणात्मक हो तथा गर्भस्थ शिशु आर एच धनात्मक हो तब प्रसव के दौरान विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। प्रथम प्रसव के समय माता व भ्रूण का रक्त आापस में मिल जाता है। इस कारण भाती में आर. एच. प्रतिरक्षी का निर्माण होता है। प्रथम शिशु का जन्म सामान्य रूप से होता है। द्वितीय गर्भावस्था में भी यदि शिशु का आर एच धनात्मक हो तो पेचीदगी उत्पन्न हो सकती है। माता के शरीर में बने आर एच प्रतिरक्षी भ्रूण के रक्त में उपस्थित आर एच कारकों से प्रतिक्रिया करते हैं। रुधिर समूहन विधि द्वारा ये प्रतिरक्षी लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर रुधि लयणता (haemolysis) उत्पन्न करते हैं। इस कारण माता के गर्भ में भ्रूण की मृत्यु तक हो जाती है । यदि शिशु जीवित रहता है तो वह अत्यन्त कमजोर तथा हिपेटाइटिस से ग्रसित होता है। इस रोग को गर्भ रक्ताणकोरकता (erythroblastosis foetalis) कहते हैं।

इस रोग के उपचार हेतु प्रथम प्रसव के 24 घण्टों के भीतर माता को प्रति IgG प्रतिरक्षियों (anti Rh.D) का टीका लगाया जाता है। इन्हें रोहगम (Rhogam) प्रतिरक्षी कहा जाता है। ये प्रतिरक्षी माता के रक्त में मिश्रित भ्रूण की आर.एच. धनात्मक रक्त कोशिओं का विनाश कर माता के शरीर में प्रतिरक्षी उत्पन्न होने से रोकती है । कई बार इस रोग के उपचार के लिए शिशु का सम्पूर्ण रक्त रक्ताधान द्वारा बदला जाता है।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • प्रतिरक्षा एवं रक्त समूह

    TRIPUTI PUBLICATION|Exercise लघूत्तरात्मक प्रश्न|10 Videos
  • पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व

    TRIPUTI PUBLICATION|Exercise निबन्धात्मक प्रश्न|3 Videos
  • भोजन एवं मानव स्वास्थ्य

    TRIPUTI PUBLICATION|Exercise निबन्धात्मक प्रश्न|2 Videos