कार्बोहाइड्रेट-ऐसे पॉलिहाइड्रॉक्सी यौगिक जिनमें ऐल्डिहाइड ल या कीटोनिक समूह उपस्थित होते हैं, कार्बोहाइड्रेट कहलाते हैं अथवा वे __ कार्बनिक यौगिक जो जल-अपघटन पर पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या ग पॉलिहाइड्रॉक्सी कीटोन देते हैं, कार्बोहाइड्रेट कहलाते हैं।
कार्बोहाइड्रेट्स हमारे भोजन का मुख्य भाग है। मनुष्य के लिए कार्बोहाइड्रेट्स के उत्तम स्रोत हैं-गेहूँ, चावल, मक्का, केला, अन्य फल व आलू आदि।
कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण
भौतिक गुणों के आधार पर इन्हें दो वर्गों में विभक्त किया गया है -
(i) शर्कराएँ-ये क्रिस्टलीय, मीठे तथा जल में घुलनशील होते हैं, न जैसे—ग्लूकोस, फ्रक्टोस, चीनी की शर्करा, लैक्टोस आदि।
(ii) अशर्कराएँ—ये अक्रिस्टलीय, स्वादहीन और जल में अविलेय होते हैं, जैसे-स्टार्च, सेलुलोस, ग्लाइकोजन आदि।
रासायनिक गुणों के आधार पर इनका वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जाता है-
(i) मोनोसैकेराइड-वे शर्कराएँ, जिनका छोटे अणुओं में जल-अपघटन नहीं होता है, मोनोसैकेराइड कहलाती हैं, जैसे-लूकोस `[C_(6)H_(12)O_(6)]`, फ्रक्टोस `[C_(6)H_(12)O_(6)]` आदि।
(ii) डाइसैकेराइड-वे शर्कराएँ, जो जल-अपघटित होकर मोनोसैकेराइडों के दो अणु बनाती हैं, डाइसैकेराइड कहलाती हैं, जैसे-सुक्रोस `(C_(12)H_(22)O_(11))`, माल्टोस `(C_(12)H_(22)O_(11))` आदि।
`underset("डाइसैकराइड")(C_(12)H_(22)O_(11) + H_(2)O) to underset("मोनोसैकेराइड")(2C_(6)H_(22)O_(6))`
(iii) पॉलिसैकेराइड-वे शर्कराएँ, जो जल-अपघटित होकर मोनोसैकेराइडों के .बहुत अधिक अणु देती हैं, पॉलिसैकेराइड कहलाती हैं, जैसे-स्टार्च, सेलुलोस।
`underset("[पॉलिसकेराइड (n-अणु)]")((C_(6)H_(10)O_(5))_(n))+ nH_(2) O to underset("मोनोसैकेराइड")(n(C_(6)H_(12)O_(6))) `
कार्बोहाइड्रेटों का महत्त्व-कार्बोहाइड्रेट भोजन का महत्त्वपूर्ण अवयव है। मुख के अन्दर आते ही इनकी पाचन क्रिया प्रारम्भ हो जाती है। लार में उपस्थित एन्जाइम टायलिन स्टार्च को माल्टोस में परिवर्तित कर देता है। अग्न्याशयिक रस जो क्षारीय प्रवृत्ति का होता है, में उपस्थित एन्जाइम एमाइलेस स्टार्च को माल्टोस में परिवर्तित कर देता है, आंत्रिक रस भी क्षारीय होता है। इसमें उपस्थित एन्जाइम माल्टेस, सुक्रेस तथा लेक्टेस आगे होने वाली अभिक्रियाओं में भाग लेते हैं। जिनमें माल्टोस, ग्लूकोस में बदलता है।
ग्लूकोस, फ्रक्टोस आदि `overset("यकृत से")to ` ग्लाइकोजन `overset("इन्सुलिन")to `ग्लूकोस `to CO_(2) + H_(2)O` + ऊर्जा
अत: ग्लूकोस रक्त धारा में अवशोषित होता है और ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकृत होकर `CO_(2)` व `H_(2)O` देता है। इसी ऑक्सीकरण अभिक्रिया के द्वारा ऊर्जा उत्पन्न होती है।
`C_(6)H_(12)O_(6) + 6O_(2) underset("एन्जाइम")overset("ऑक्सीडेज ")to6CO_(2) uarr + 6H_(2)O + 677`किलोकैलोरी
डाइ तथा पॉलिसैकेराइड का जल-अपघटन होता है तथा मोनोसैकेराइड बनते हैं जो फिर ऑक्सीकृत होकर ऊर्जा प्रदान करते हैं। सेलुलोस हमारे शरीर में ऊर्जा प्रदान नहीं करता है बल्कि मल को निकालने में सहायक होता है। हमारे लिवर में कार्बोहाइड्रेट ग्लाइकोजन के रूप में जमा रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर यह ग्लूकोस में जल-अपघटित हो जाता है तथा शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
कार्बोहाइड्रेट का परीक्षण-अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर संख्या 1 का उत्तर (मॉलिश परीक्षण) देखें।