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BIOLOGY
प्रतिबन्धन एन्जाइम से आप क्या समझते है? ...

प्रतिबन्धन एन्जाइम से आप क्या समझते है? टिप्पणी कीजिए।

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प्रतिबंधन एन्जाइम
जीवाणु ई० कोलाइ से वर्ष 1963 में दो एन्जाइम पृथक किए गए जो ई० कोलाइ में जीवाणुभोजी वृद्धि को रोक देते है। इनमे एक डी०एन०ए० ए मैथिल समूह को जोड़ता है जबकि दूसरा डी०एन०ए० को काटता है। डी०एन०ए० को काटने वाले एन्जाइम को प्रतिबन्धन एण्डोन्युक्लिएज (restriction endonuclease) कहते है।
विषाणुओ के डी०एन०ए० को काटने वाले एन्जाइम को निम्न कारणों से रिस्ट्रिक्शन एण्डोन्युक्लिएज नाम दिया गया -
(a) रेस्ट्रिक्शन इसलिए क्योकि यह विषाणुओ के डी०एन०ए० को काटकर इनकी वृद्धि एव इनका गुणन रोकते है।
(b) .न्युक्लिएज. इसलिए क्योकि यह डी०एन०ए० का विघटन करते है।
(c) .एण्डोन्युक्लिएज. इसलिए नाभिकीय अम्ल की सिरों (ends) की और से नहीं अपितु बीच में से काटते है।
प्रतिबन्ध एण्डोन्युक्लिएज (restriction endonuclease) का नामकरण - किसी भी एन्जाइम के नाम का प्रथम अक्षर उस जीवाणु के वंश से लिया जाता है जिससे उसे विलगित किया जाता है। इसके पशचात के दो अक्षर उस जीवाणु की जाति से संबन्धित होते है , त्तपस्यचात उसका प्रभेद एव अंत में उसकी खोज में लिखा जाता है।
एण्डोन्युक्लिएज ऐसे एन्जाइम होते है जो किसी भी डी०एन०ए० अनु को अनेक स्थानों से काटने की क्षमता रखते है , परन्तु प्रतिबन्ध एण्डोन्युक्लिएज ऐसे एन्जाइम होते है जो डी०एन०ए० अणुओ को ऐसे स्थानों पर काटते है जहाँ पर विशिष्ट क्षार शृंखलाएँ होती है। इन स्थानों को अभिज्ञान स्थल (recognition sites) कहा जाता है।
Ava I लिए यह अभिज्ञान स्थल 5. CTC GAG - 3
3. GAGCTC - 5.
एक I के लिए 5. GAATTC - 3
3. CTTAAG - 5. है
प्रथम उपयोग प्रतिबन्ध एण्डोन्युक्लिएज से 1970 में विलगित किया गया था जिसके लिए स्मिथ, नाथन्स तथा आर्बर (Smith, Nathans and Arber, 1978 ) को नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
एण्डोन्युक्लिएज एन्जाइम वास्तव में न्युक्लिएज एन्जाइम का एक प्रकार है। एक अन्य प्रकार के न्युक्लिएज एन्जाइम है जिन्हे एक्सोन्युक्लिएज (exonuclease) कहा जाता है। एक्सोन्युक्लिएज इसलिए क्योकि यह डी०एन०ए० को इसके सिरों (एंड्स) से काटते है।
प्रत्येक रेस्ट्रिक्शन एक्सोन्युक्लिएज डी०एन०ए० की लम्बाई में एक विशिष्ट अनुक्रम की पहचान करता है। इसकी पहचान हो जाने पर एण्डोन्युक्लिएज एन्जाइम डी०एन०ए० से जुड़ जाते है व् इसके दोनों रजुक्को को शर्करा - फास्फेट शृंखला के विशिष्ट स्थानों पर काट देता है। यह यह कार्य पेलिन्ड्रोमिक न्यूक्लियोटाइड अनुकर्मो की पहचान से ही सम्भव होता है। सीधे कर्म व उलटे कर्म में पढ़ने पर समान लगने वाले शब्द पैलिन्ड्रोम (Palindrome) कहलाते है।
ऐसे एन्जाइम के कुछ उद्धरण है `Eco RI, Alu I, Bam HI` आदि। एक और एन्जाइम नए क्रन्तिकारी पुनर्योगज डी०एन०ए० तकनीक को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह डी०एन०ए० लाइगेज (D.N.A ligase)। एन्टीबायोटिक प्रतिरोध जिन को प्लाज्मिड से जोड़ने का कार्य डी०एन०ए० लाइगेज नए किया। यह एन्जाइम डी०एन०ए० के कटे सिरों (cut ends) को आपस में जोड़ने में सक्षम होता है।
प्रतिबन्ध एन्जाइम व डी०एन०ए० की खोज से ही विजातीय `D.N.A` धारण करने वाले `D.N.A` (Recombinant D.N.A) पुनर्योगज का निर्माण सम्भव हो सका। इसका अर्थ है की अनुवांशिक अभियनंत्रिकी (Genetic Engineering) की नीव रखने में इन्ही दोनों एन्जाइम की प्रमुख भमिका है।
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