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PHYSICS
एक कुण्डली लोहे के क्रोड पर लपेटी जाती ह...

एक कुण्डली लोहे के क्रोड पर लपेटी जाती है और वापस अपने पर ही लूप बनाकर लाई जाती है ताकि क्रोड पर दो विपरीत दिशाओं में धाराएँ ले जा रही श्रेणीक्रम में जुड़ी पास-पास लिपटी हुई तारों के दो सेट हों। इसके स्व-प्रेरकत्व के बारे में आप क्या अनुमान लगाते हैं? क्या यह ज्यादा होगा या कम?

लिखित उत्तर

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श्रेणीक्रम में पास-पास लिपटी तारों के दो सेट श्रेणीक्रम में दो प्रेरकत्व (`L_(1)` और `L_(2)`) हैं। क्योंकि तारें विपरीत दिशाओं में धाराएँ वह कर रही हैं, इसलिए उनका परिणामी प्रेरकत्व
`L_(s)=L_(1)+L_(2)-2M`
जहाँ M, दोनों सेटों का पारस्परिक प्रेरकत्व है। यह स्पष्ट है कि `L_(1)=L_(2)=L` (मान लें) और यह दर्शाया जा सकता है कि M = L है। इस प्रकार
`L_(s)=L+L-2L=0`
स्पष्टतया, परिणामी प्रेरकत्व नगण्य है। गुणात्मक रूप से यह कम प्रेरकत्व, विरुद्ध दिशाओं में बह रही धाराओं के कारण दोनों कुण्डलियों में प्रेरित विद्युत वाहक बल के एक दूसरे को निरसित करे देने के कारण है।
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