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Class 12
PHYSICS
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निम्न चित्रों 1(a) से (f) में दर्शाई गई स्थितियों में प्रेरित धारा की दिशा बताएँ।

लिखित उत्तर

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(a) जब एक चुम्बक कुण्डली की ओर बढ़ता है, तो कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है। लेन्ज के नियम के अनुसार सिरे q पर दक्षिणी ध्रुव उत्पन्न होता है ताकि चुम्बक की कुण्डली की ओर गति का विरोध हो। (कुण्डली के चुम्बक वाले पार्श्व से देखने पर) प्रेरित धारा की दिशा दक्षिणावर्त अर्थात‌ arpq के अनुदिश है।
(b) जैसा (a) में वर्णन किया गया है, लेन्ज के नियम के अनुसार कुण्डली pq के सिरे q पर दक्षिणी ध्रुव उत्पन्न होता है (क्योंकि चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव इसकी ओर बढ़ता है) और कुण्डली xy के भी सिरे x पर दक्षिणी ध्रुव उत्पन्न होता है (क्योंकि उत्तरी ध्रुव इससे परे जाता है)। इसलिए प्रेरित धारा कुण्डली pq में prqp के अनुदिश और कुण्डली xy में yzxy के अनुदिश बहती है।
(c ) दाब कुंजी को बायें लूप में बन्द करते ही दर्शाई दिशा में धारा की वृद्धि होती है। पारस्परिक प्रेरण के कारण दाएँ लूप में प्रेरित धारा, विपरीत दिशा अर्थात yzxy के अनुदिश बहती है ताकि इस वृद्दि का विरोध हो।
(d) जब धारा नियंत्रक, दर्शाए अनुसार बदला जाता है, तो (धारा नियंत्रक के बढ़ते प्रतिरोध के कारण) दाएँ लूप में धारा घटती है। पारस्परिक प्रेरण के कारण बाएँ लूप में प्रेरित धारा उसी दिशा xyxz में बहती है ताकि दाएँ लूप में धारा में कमी का विरोध हो (अर्थात्‌ धारा को सहारा मिले)।
(e ) दाब कुंजी को छोड़ते ही बाईं परिनालिका में धारा अधिकतम से कम होकर शून्य हो जाती है (अर्थात इसका क्षय होता है)। पारस्परिक प्रेरण के कारण दाईं परिनालिका में प्रेरित धारा ऐसी दिशा में उत्पन्न होती है जो क्षय को रोकने की कोशिश करती है। यह तभी सम्भव है यदि दाईं परिनालिका में प्रेरित धरा उसी दिशा में बहे जिसमें यह बाईं परिनालिका में बहती है अर्थात x r y x दिशा में।
(f) तार के कारण `vecB` की दिशा वृत्ताकार कुण्डली के तल में है। इसलिए `phi_(B)=0` है। इस प्रकार कुण्डली में कोई प्रेरित धारा नहीं होती।
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