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PHYSICS
ठोसों में ऊर्जा - पट्टी क्या है ? किस प्...

ठोसों में ऊर्जा - पट्टी क्या है ? किस प्रकार पट्टी - सिद्धांत के आधार पर अर्धचालक , कुचालक एवं चालक को वर्गीकृत किया जाता है ?

लिखित उत्तर

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बोर की मान्यता- परमाण में एक सूक्ष्म धनावाशत कद होता है, जहाँ । सम्पूर्ण दव्यमान सनि। माना गया । यह केन्द्र परमाण का नाभिक कहलाता है
(ii) इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित विज्या को स्थिर कक्षाओं में एक जब तक इलेक्ट्रॉन उस कक्षा में होता है वह उर्जा उत्सजित नहीं करता है।
(iii) इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं, जिनमें इसके कोणीय संग  है, जब इलेक्ट्रोन उच्च ऊर्जा`(h)/(2pi)`का बहसमाकलन होता है।
(iv) उर्जा फॉटॉन (Photon) के रूप में केवल तब निकलती है, जब इलेको स्तर से निम्न उर्जा स्तर में जाता है।
`hv=E_(i)-E_(f)`
इलेक्टॉन का उर्जा- माना कि हाइड्रोजन परमाणु जिसमें एक इलेक्ट्रॉन नाभिक के ओर - त्रिज्या की वत्ताकार कक्षा में`E_(k)` गतिज उजो से परिभ्रमण करता है तथा इसका सही स्थितिज उर्जा `E_(p)`, है ।
  इलेक्टॉन के बीच आकर्षण बल-`F_(e)=(1)/(4piepsilon_(0)).(e.e)/(r^(2))=(1)/(4piepsilon_(0)).(e^(2))/(r^(2))`
यह बल इलेक्ट्रोन को एक वृत्ताकार कक्ष में परिक्रमा के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल =
यह बल इलेक्ट्रोन को एक वृत्ताकार कक्ष में परिक्रमा के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल =अतः `F_(c)=(mV^(2))/(r)`
अत: `F_9e)=F_(c)`
`(mv^(2))/(r)=(1)/(4piepsilon_(0)).(e^(2))/(r^(2))impliesmnu^(2)=(1)/(4piepsilon_(0)).(e^(2))/(r)implies(1)/(2)mnu^(2)=(1)/(4piepsilon).(e^(2))/(2r)`
`K.E.=(1)/(2)mnu^(2)=(1)/(8piepsilon_(0))=((e^(2))/(r))`
अब कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की स्थितिज उर्जा
`U=` कक्षा में नाभिक के कारण विद्युत विभव x इलेक्ट्रॉन
`U=(1)/(4piepsilon_(0))((e)/(r))(-e)=-(1)/(4piepsilon_(0)).(e^(2))/(r)`
अतः कक्षा में कुल उर्जा
`E=KE+PE=(1)/(8piepsilon_(0))(e^(2))/(r)=(1)/(4piepsilon_(0))(e^(2))/(r)`
`E=-(1)/(8 epsilon_(0))(e^(2))/(r)`
`E_(n)=(1)/(4piepsilon_(0))((e^(2))/(2r_(n)))`
बँकि`r_(n)=(n^(2)h^(2))/(4pi^(2)kme^(2))`का मान E,, में रखने पर
उर्जा-पट्री-ठोसों में विद्युत चालकता का गुण उनके संयोजी बैण्ड तथा चालन - उर्जा अन्तराल के आधार पर किया जाता है । जब इलेक्टॉन संयोजी बैण्ड में जा र ठोस में विद्युत धारा प्रवाहित होती है । संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड में कूदने के ती दलेक्टॉन की आवश्यक न्यूनतम उर्जा, वर्जित उर्जा, अन्तराल की उर्जा के परिणाम बैण्ड के मध्य उर्जा अन्तराल । सकते हैं, तब ठोस में विद्यत  के बराबर होती है ।
उर्जा बैण्ड द्वारा ठोसों का वर्गीकरण निम्न है
(a) चालक (धातु)-हम देखते हैं कि चालन बैंड चालक में चालन बैंड तथा संयोजी बैंड एक-दसरे पर अध्यारोपित होते हैं यानि कि दोनों बैंड में कोई वर्जित उर्जा अन्तराल नहीं संयोजीबैंड होता है । चूँकि इलेक्ट्रॉन की प्रचुरता चालन  अति व्यापित भाग बैंड में बनी रहती है अतः चालक विद्युत का सुचालक होता है । जैसे ताँबा, सोना, लोहा आदि

अर्धचालक-चित्र से स्पष्ट है, अर्धचालक में संयोजी बैंड तथा चालन बैंड के बीच वर्जित उर्जा अन्तर कुछ होता है, इसलिए चालन बैंड में कुछ इलेक्ट्रॉन होते हैं । अतः अर्धचालक में विद्यत प्रवाह कम होता है । जैसे जर्मेनियम, सिलीकन आदि

(c) कुचालक-कुचालक-बैंड चित्र से यह स्पष्ट है कि चालन बैंड और संयोजी बैंड के बीच उर्जा अन्तराल बहत ज्यादा है । इलेक्ट्रॉन को संयोजी बैंड से चालन बैंड में कूदने के लिए 3 en से अधिक उर्जा की जरूरत होगी । अतः संयोजी बैंड से चालन बैंड में इलेक्ट्रॉन नहीं आ पाता है । इसलिए इसमें विद्युत का प्रवाह नहीं होता है ।।
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