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PHYSICS
लॉरेंज बल से क्या तात्पर्य है ? लारेंज ब...

लॉरेंज बल से क्या तात्पर्य है ? लारेंज बल के आधार पर वैघुत चुम्बकीय प्रेरण की व्यख्या कीजिए |

लिखित उत्तर

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फैराडे के नियम की उत्पत्ति-फैराडे के प्रयोगों से स्पष्ट होता है, "जब किसी बन्द परिपथ में से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है तो परिपथ में वैद्युत धारा प्रवाहित हो जाती है।" इसकी व्याख्या लॉरेन्ज बल के आधार पर की जा सकती है-
माना । लम्बाई की एक चालक छड़ JK (चित्र) एक U आकार के स्थिर चालक ABCD की भुजाओं पर चित्रानुसार v वेग से दायीं ओर को चलाई जा रही है। माना यान्त्रिक घर्षण नगण्य है तथा U चालक एक ऐसे एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में स्थित है जो कि कागज के तल के नीचे लम्बवत् की ओर दिष्ट है। चालक छड़ JK की गति के कारण चालक छड़ में उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर एक चुम्बकीय (लॉरेन्ज) बल `F_(M) (=qvB)` कार्य करता है जो कि इलेक्ट्रॉनों को चालक छड़ के J सिरे से K सिरे की ओर ले जाता है। चूंकि इलेक्ट्रॉनों को एक बन्द परिपथ उपलब्ध है, अत: वे मार्ग `K to C to B to J` पर अनुगमन वेग से चलने लगते हैं। इस प्रकार परिपथ में वैद्युत धारा स्थापित हो जाती है जिसकी दिशा `J to B to C to K to J` (वामावर्त) है। जब तक चालक छड़ JK को चुम्बकीय क्षेत्र में चलाते रहते हैं तब तक परिपथ में धारा प्रवाहित होती रहती है। इससे यह स्पष्ट है कि गतिमान चालक छड़ में एक वैद्युत वाहक बल प्रेरित हो जाता है जो कि परिपथ में धारा बनाए रखता है। चूंकि चालक छड़ में प्रेरित वैद्युत वाहक बल चालक छड़ की .गति. के कारण है, अत: इसे गतिक वैद्युत वाहक बल (Motional EMF) भी कहते हैं। इसकी उत्पत्ति का कारण अथवा प्रेरित धारा की उत्पत्ति का कारण गतिमान चालक छड़ में मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर लगने वाला लॉरेन्ज बल है।
चुम्बकीय क्षेत्र में होता है तो उस पर एक बल लगता है जिसकी दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियमानुसार होती है। धारावाही चालक छड़ JK पर चुम्बकीय क्षेत्र B द्वारा आरोपित बल
`F = ilB`
बल F की दिशा बायीं ओर को है, अत: चालक छड़ को एक नियत वेग v से दायीं ओर को चलाए रखने के लिए इस पर F के बराबर एवं विपरीत बल F लगाना होगा।
`F = -F = - ilB`
माना बल F के कारण चालक छड़ JK, समयान्तराल `Deltat` में दूरी `Deltax` तय करती है तथा J.K. स्थिति में आ जाती है, अत: चालक छड़ पर किया गया कार्य
`W = FG xx Deltax =-ilBDeltax`
परन्तु
`deltax=` वेग `xx` समयान्तराल `=uxxDeltat`
अतः `W = -ilBvDeltat =-Bvl(ixxDeltat)`
परन्तु `i xx Deltat = q` परिपथ में `Deltat` समय में प्रवाहित आवेश
अतः `W = -Bvlq`
यह कार्य ही परिपथ में आवेश प्रवाह के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। किसी सेल द्वारा किसी परिपथ में एकांक आवेश को प्रवाहित करने में किया गया कार्य ही सेल का वैद्युत वाहक बल कहलाता है, अत: छड़ JK (जोकि परिपथ JRCK में एक सेल का कार्य कर रही हैं) मे प्रेरित वैद्युत वाहक बल
`e = W//q =-Bvl" "...(1)`
समयांतराल `Deltat` में परिपथ का क्षेत्रफल JBCK से बढ़कर JBCK हो जाता है, अतः इस समयांतराल में परिपथ से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन
`Deltaphi =` चुम्बकीय क्षेत्र `xx` क्षेत्रफल में परिवर्तन (JJKK)
`=Bxx(lxxDeltax)`
अतः चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर ` = (Deltaphi)/(Deltal) = Bl(Deltax)/(Deltat)`
परन्तु `Deltax//Deltat=v` (छड़ का वेग), अतः `(Deltaphi)/(Deltal) = Blv" "...(2)`
समीकरण (1) व समीकरण (2) की तुलना करने पर,
`e = -(Deltaphi)/(Deltat)` यदि `Deltat to 0` है तो `e = -(dphi)/(dt)`
यही फैराडे का वैघुत चुम्बकीय प्रेरण सम्बन्धी द्वितीय नियम है |
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