कोण i पर आपतित एक किरण पर विचार कीजिये करे। इस किरण का एक भाग वायु - फिल्म अंतरापृष्ठ से परावर्तित होता है तथा एक भाग अंदर अपवर्तित होता है। यह फिल्म -काँच अंतरापृष्ठ पर अंशतः परावर्तित अंशतः पारगत होती है। परावर्तित किरण का एक भाग फिल्म -वायु अंतरापृष्ठ पर परावर्तित होता है तथा एक भाग `r_(2)` की तरह पारगत के समान्तर पारगत होता है। वास्तव में क्रमिक परावर्तन तथा पारगमन तरंग के आयाम को घटाते रहेंगे। अतः`r_(1)` तथा `r_(2)` किरणे व्यवहार पर छाई रहेगी। यदि आपतित प्रकाश लेंस द्वारा पारगमित हो तो`r_(1)` तथा`r_(2)` से विनाशी व्यतिकरण होना चाहिए। A तथा D दोनों पर परावर्तन नहीं होगा। `r_(2)` तथा `r_(1)` के बीच प्रकाशिक पथांतर है
`n(AD+CD) -AB`
यदि d फिल्म की मोटाई है तो
`AD = CD = d/(cos r)`
`AB = AC sin i `
`(AC)/2 = d tan r `
` :. AC = 2d tan r`
अतः `AB = 2d tan r sin i `
अतः पथांतर है
`2n. d/(cos r)- 2d " tan r sin i "`
` = 2 (sin i)/(sin r) d/(cos r) -2d (sin r)/(cos r) sin i`
` = 2d sin [(1-sin^(2)r)/(sin r cos r)] `
` = 2nd cos r `
इन तरंगो के विनाशी व्यतिकरण के लिए यह `lambda//2 ` के बराबर होना चाहिए
` rArr 2nd cos r = lambda/2`
या ` :. nd cong lambda/4`
कैमरे के लेंस के लिए ,स्रोत्र ऊर्ध्वाधर तल में है और इसलिए
` i cong r cong 0`
` :. nd cong lambda/4`
` rArr d = (5500 A)/(1.38 xx4) cong 1000 A` .