चित्र में दर्शाये अनुसार एक नाली के दो भाग है । निचला भाग एक आयताकार नली है जिसका अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A तथा ऊंचाई h है। ऊपरी भाग एक शंक्वाकार नली है जिसके आधार का क्षेत्रफल A तथा ऊंचाई h है और शंकु का ऊपरी क्षेत्रफल a है । शंक्वाकार नली की दीवार ऊर्ध्वाधर से `30^(@)` के कोण पर है। एक द्रव्य जिसका घनत्व `rho` है दोनों भागों में 2h ऊंचाई तक भरते हैं। तब (वायुमण्डलीय दाब को नगण्य मानिये )