मनुष्य का मस्तिष्क- मस्तिष्क एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कोमल अंग है। तंत्रिका तंत्र के द्वारा शरीर की क्रियाओं के नियंत्रण और समन्वयन में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका मस्तिष्क की ही होती है। मस्तिष्क खोपड़ी (skull) की मस्तिष्क गुहा या क्रेनियम (brain box or cranium) के अन्दर सुरक्षित रहता है। यह चारों ओर से तन्तुमय संयोजी ऊतक (fibrous connective tissue) की एक झिल्ली से घिरा होता है जिसे मेनिंजीज (meninges) कहते हैं। यह झिल्ली कोमल मस्तिष्क को बाहरी आघातों तथा दबाव से बचाता है। मेनिंजीज और मस्तिष्क के बीच सेरीब्रोस्पाइनल द्रव्य (cerebrospinal fluid) भरा होता है। मस्तिष्क की गुहा भी इस द्रव्य से भरी होती है। सेरीब्रोस्पाइनल द्रव्य मस्तिष्क को बाहरी आघातों से सुरक्षित रखने में मदद करता है तथा यह मस्तिष्क को नम बनाये रखता है।
मनुष्य का मस्तिष्क अन्य कशेरुकों की अपेक्षा ज्यादा जटिल और विकसित होता है। इसका औसत आयतन लगभग 1950 mL तथा औसत भार करीब 1.5kg होता है। मस्तिष्क को तीन प्रमुख भागों में बाँटा गया है-1. अग्रमस्तिष्क (forebrain), 2. मध्यमस्तिष्क (midbrain) तथा 3. पश्चमस्तिष्क (hindbrain)|
1. अग्नमस्तिष्क- यह दो भागों (क) प्रमस्तिष्क या सेरीब्रम (cerebrum) तथा (ख) डाइएनसेफलॉन (diencephalon) में बँटा होता है।
(क) प्रमस्तिष्क या सेरीब्रम- यह मस्तिष्क के शीर्ष, पार्श्व तथा पश्च भागों को ढंके रहता है। यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग (प्रायः 2/3 हिस्सा) है। यह एक अनुदैर्घ्य खाँच द्वारा दायें एवं बायें भागों में बँटा होता है, जिन्हें प्रमस्तिष्क गोलार्द्ध (cerebral hemisphere) कहते हैं। दोनों गोलार्द्ध तंत्रिका ऊतकों से बना कॉर्पस कैलोसम (corpus callosum) नामक रचना के द्वारा एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। गोलार्द्ध में अनेक अनियमिताकार उभरी हुई रचनाएँ होती हैं जिन्हें गाइरस (gyrus) कहते हैं। दो गाइरस के बीच अवनमन (depression) वाले स्थान को सल्कस (sulcus) कहते हैं। इनके कारण प्रमस्तिष्क वल्कुट (cerebral cortex) का बाहरी क्षेत्र (surface area) बढ़ जाता है। कॉर्टेक्स, सेरीब्रम का बाहरी मोटा धूसर आवरण है जिस पर अलग-अलग निर्दिष्ट केन्द्र (speech) होते हैं, जो विभिन्न शारीरिक क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय कुशलतापूर्वक करते हैं।
यह मस्तिष्क का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भाग है। यह बुद्धि और चतुराई का केन्द्र है। मानव में किसी बात को सोचने-समझने की शक्ति, स्मरण-शक्ति, किसी कार्य को करने की प्रेरणा, घृणा, प्रेम, भय, हर्ष, कष्ट के अनुभव जैसी क्रियाओं का नियंत्रण और समन्वय सेरीब्रम के द्वारा ही होता है। यह मस्तिष्क के अन्य भागों के कार्यों पर भी नियंत्रण रखता है। जिस व्यक्ति में यह औसत से छोटा होता है तथा गाइरस और सल्कस कम विकसित होते हैं, वह व्यक्ति मंद बुद्धि का होता है।
(ख) डाइएनसेफलॉन- अग्रमस्तिष्क का यह भाग प्रमस्तिष्क गोलार्डों के द्वारा ढंका होता है। यह कम या अधिक ताप के आभास तथा दर्द और रोने जैसी क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
2. मध्यमस्तिष्क- यह मस्तिष्क स्टेम (brain stem) का ऊपरी भाग है। इसमें अनेक तंत्रिका कोशिकाएँ (केन्द्रिकाएँ) कई समूहों में उपस्थित होती हैं। इसमें संतुलन एवं आँख की पेशियों को नियंत्रित करने के केन्द्र होते हैं।
3. पश्चमस्तिष्क- पृष्ठभाग में (क) अनुमस्तिष्क या सेरीबेलम (cerebellum) एवं अधरभाग में (ख) मस्तिष्क स्टेम (brain stem) मिलकर पश्चभाग बनाते हैं।
(क) अनुमस्तिष्क या सेरीबेलम- अनुमस्तिष्क मुद्रा (posture), समन्वय, संतुलन, ऐच्छिक पेशियों की गतियों इत्यादि का नियंत्रण करता है। यदि मस्तिष्क से सेरीबेलम को नष्ट कर दिया जाए तो सामान्य ऐच्छिक गतियाँ (normal voluntary movements) असंभव हो जायेंगी। उदाहरण के लिए, हाथों का परिचालन ठीक से नहीं होगा, अर्थात् वस्तुओं को पकड़ने में हाथों को कठिनाई होगी, पैरों द्वारा चलना मुश्किल हो जाएगा आदि। इसका कारण यह है कि हाथों और पैरों की ऐच्छिक पेशियों का नियंत्रण सेरीबेलम के नष्ट होने से समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार, बातचीत करने में कठिनाई होगी, क्योंकि तब जीभ और बड़ों की पेशियों के कार्यों का समन्वय नहीं हो पायेगा इत्यादि।
(ख) मस्तिष्क स्टेम (Brain Stem)-इसके अंतर्गत
(i) पॉन्स वैरोलाई (pons varolii) एवं (ii) मेडुला ऑब्लांगेटा (medulla oblongata) आते हैं।
(i) पॉन्स वैरोलाई-तंत्रिका तन्तुओं से निर्मित पॉन्स (pons) मेडुला के अग्रभाग में स्थित होता है। यह श्वसन को नियंत्रित करता है।
(ii) मेडुला ऑब्लांगेटा—यह बेलनाकार रचना है जो पीछे की ओर स्पाइनल कॉर्ड या मेरुरज्जु के रूप में पाया जाता है। स्पाइनल कॉर्ड मस्तिष्क के पिछले सिरे से शुरू होकर रीढ़ की हड्डियों में न्यूरल कैनाल (neural canal) के अन्दर से होता हुआ नीचे की ओर रीढ़ के अंत तक फैला रहता है। इसी में अनैच्छिक क्रियाओं के नियंत्रण केन्द्र स्थित होते हैं।
मेडुला द्वारा आवेगों का चालन मस्तिष्क और मेरुरज्जु के बीच होता है। मेडुला में अनेक तंत्रिका केन्द्र होते हैं जो हृदयस्पंदन या हृदय की धड़कन (heartbeat), रक्तचाप (blood pressure) और श्वसन गति की दर (rate of respiration) का नियंत्रण करते हैं। मस्तिष्क के इसी भाग द्वारा विभिन्न प्रतिवर्ती क्रियाओं, जैसे-खाँसना (coughing), छींकना (sneezing), उल्टी करना (vomiting), पाचन रसों के स्राव इत्यादि का नियंत्रण होता है।