क्लोर-एल्कली प्रक्रम में क्लोरीन गैस, NaOH क्षार तथा हाइड्रोजन गैस बनती है। प्रक्रम को निम्नलिखित समीकरण के रूप में लिखा जा सकता है-
`underset("सोडियम क्लोराइड")(2NaCl(aq))+underset("जल")(2H_(2)O(l))tounderset("सोडियम हाइड्रोक्साइड")(2NaOH(aq))+underset("क्लोरीन")(Cl_(2)(g))+underset("हाइड्रोजन")(H_(2)(g))`
(a) सोडियम हाइड्रोक्साइड के उपयोग
(i) साबुन उद्योग में इसका उपयोग वसा तेल के हाइड्रोलिसिस के लिए किया जाता है।
(ii) इसका उपयोग कागज़ व कपड़ा उद्योग में किया जाता है।
(iii) इसका उपयोग रेयॉन के निर्माण में किया जाता है।
(iv) इसे प्रयोगशाला अभिकारक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
(b) क्लोरीन गैस के उपयोग `(CI_(2))`-
(i) यह विरंजक चूर्ण के निर्माण में प्रयोग की जाती है।
(ii) इसे जल को रोगाणु-रहित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
(iii) इसे क्लोरो-हाइड्रोजन, जैसे क्लोरोफोर्म, कार्बन टेट्राक्लोराइड आदि के निर्माण में प्रयोग करते हैं।
(iv) इसे क्लोरो-फ्लोरो कार्बन के (CFCs) निर्माण में प्रयोग करते हैं जिसका उपयोग रेफ्रिजरेशन में करते हैं।