इन्हें टूटता तारा भी कहते हैं। रात्रि के समय साफ आकाश और काली रात में कभी-कभी टूटते दिखाई देते हैं। ये तारे नहीं बल्कि उल्काएँ हैं। ये सामान्यतः छोटे पिंड होते हैं जो कभी-कभी पृथ्वी के वायुमंडल में तीव्र गति से प्रवेश कर जाते हैं। वायुमंडल से घर्षण के कारण ये गर्म होकर जलने लगते हैं और वाष्प बनकर उड़ जाते हैं। इसलिए ये चमकीली धार के समान दिखाई पड़ते हैं।
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