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BIOLOGY
एक जीन में एक एकल क्षारक उत्परिवर्तन सदै...

एक जीन में एक एकल क्षारक उत्परिवर्तन सदैव हानि या प्राप्ति के कार्य को परिणित नहीं करता। क्या आप सोचते हैं कि कथन सत्य है? अपने उत्तर का समर्थन लिखिए।

लिखित उत्तर

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(i) कथन सत्य है, कोडॉन्स की विकृति, कोडॉन के तीसरे क्षारक पर उत्परिवर्तन प्राय: फीनोटाइप में किसी प्रकार का उत्परिवर्तन उत्पन्न नहीं करता है। यह “शाइलेन्ट म्यूटेशन" कहलाता है।
(ii) दूसरी ओर, यदि कोडॉन इस प्रकार परिवर्तित होता है कि अब यह अन्य अमीनो अम्ल को विशिष्टीकृत करता है, यह प्रोटीन के कार्य को बदल देगा जैसा कि हीमोग्लोबिन प्रोटीन की बीटाग्लोबिन के केस में हो जाता है।
(iii) जहाँ ग्लूटामिक अम्ल के स्थान पर वेलीन का प्रतिस्थापन होता है, इसकी संरचना एवं कार्यों में परिवर्तन उत्पन्न होता है परिणामस्वरूप सिकिल सेल लक्षण उत्पन्न होता है।
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