(i) अमीनो अम्लों के बहुलकीकरण से एक पॉलीपेप्टाइड के निर्माण की प्रक्रिया अनुवादन कहलाती है।
(ii) प्रोटीन संश्लेषण के तीन पद होते हैं
(a) प्रारम्भनः
1. राइबोसोम्स का mRNA पर जमाव : प्रोकैरियोट्स में प्रारम्भन के लिए बड़ी एवं छोटी राइबोसोम उपइकाइयों, mRNA, प्रारम्भन tRNA तथा तीन प्रारंभन कारकों (IFs) की आवश्यकता होती है।
2. अमीना अम्लों का सक्रियण : अमीनो अम्ल, एडिनोसिन ट्राइफॉस्फेट (ATP) की उपस्थिति में अमीनोएसाइल tRNA सिन्थेटेज एन्जाइम से बन्धन बनाकर सक्रिय हो जाते हैं अमीनोएसाइल tRNA
3. अमीनो अम्ल (AA) + ATP `("अमीनोएसाइल tRNA")/("सिन्थेटेज")`
AA-AMP - एन्जाइम समिश्र + Pi. अमीनो अम्ल का RNA पर स्थानान्तरण।
4. AA-AMP - एन्जाइम समिश्र, विशिष्ट tRNA के साथ सक्रिय होकर अमीनोएसाइल समिश्र बनाता है।
5. AA-AMP - एन्जाइम समिश्र + tRNA `to` AA t RNA + AMP + एन्जाइम
• mRNA का कैप क्षेत्र राइबोसोम की छोटी उपइकाई को जोड़ता है। राइबोसोम में दो स्थल होते हैं- A-स्थल तथा P-स्थला
• छोटी उपइकाई सबसे पहले प्रारम्भक tRNA को जोड़ती है उसके बाद बड़ी उपइकाई को जोड़ती है। अतः प्रारम्भन कोडॉन (AUG) P-स्थल पर आ जाता है। प्रारम्भन ERNA (अर्थात् मिथायोनिल ERNA) अब P-स्थल पर होता है।
(b) दीर्घकरण:
1. अन्य आवेशिक अमीनोएसाइल tRNA समिश्र राइबोसोम के A स्थल पर जुड़ते हैं।
2. पेप्टाइड बन्ध निर्माण और mRNA के साथ गति स्थानान्तरण कहलाता है। एक पेप्टाइड बन्ध अमीनो अम्ल के P-स्थल पर कार्बोक्सिल समूह तथा A-स्थल पर अमीनो समूह के बीच, एन्जाइम पेप्टाइडिल ट्रांसफरेज द्वारा बनता है।
3. राइबोसोम mRNA पर कोडॉन से कोडॉन तक सरकते जाते हैं 5.`to` 3. दिशा में।
4. कोडॉन के अनुक्रम के अनुसार, अमीनो अम्ल एक-दूसरे से पेप्टाइड बन्धों द्वारा जुड़ते जाते हैं और पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला बनती है।
(c) समापन :
1. जब राइबोसोम का A स्थल समापन कोडॉन पर पहुँचता है आवेशित tRNA A-स्थल पर नहीं बंधते हैं।
2. राइबोसोम से पॉलीपेप्टाइड शृंखला का पृथक्करण होता है यह, रिलीज कारक. द्वारा उत्प्रेरित होता है।
3. तीन समापन कोडॉन होते हैं- UGA, UAG तथा UAA.
चित्र : अनुवादन की प्रक्रिया