मानव जीनोम के अनुक्रम बनाने में प्रयुक्त विधियों का विवरण दीजिए।
लिखित उत्तर
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(i) मानव जीनोम के अनुक्रम ने विभिन्न जीन्स एवं इनके कार्यों के बीच संबंध को समझना आसान कर दिया है। यदि किसी जीन में कोई दोष है, जो विकार के रूप में अभिव्यक्त होता है या जो किसी व्यष्टि की किसी रोग के प्रति ग्राह्यता को बढ़ा देता है तब विशेष जीन चिकित्सा पर कार्य किया जा सकता है। (ii) मानव जीनोम अनुक्रम की कार्यविधियाँ- इनमें दो मुख्य उपागम भाग लेते हैं (1) अभिव्यक्त अनुक्रम टेग्स (ESTs) : यह विधि उन सभी जीन्स की पहचान करती है जो RNA के रूप में अभिव्यक्त होती हैं। (2) अनुक्रम टिप्पणन- यह विधि जीनोम के सम्पूर्ण सेट को अनुक्रमित करती है जिसमें कोडिंग एवं नॉन-कोडिंग सभी अनुक्रम सम्मिलित होते हैं और अंततः अनुक्रम में कार्यों सहित विभिन्न क्षेत्रों को निर्धारित करते हैं। (a) अनुक्रम के लिए: 1. सर्वप्रथम कोशिका से कुछ DNA को पृथक कर लिया जाता है और अपेक्षाकृत छोटे आकार के टुकड़ों में तोड़ लिया जाता है। उपयुक्त वाहक की सहायता से इन DNA खण्डों को उपयुक्त पोषक में क्लोन कराया जाता है। 2. जब वाहक के रूप में जीवाणु का उपयोग किया जाता है तब वे जीवाण्विक कृत्रिम गुणसूत्र (BAG) कहलाते हैं और जब वाहक के रूप में यीस्ट का उपयोग किया जाता है तब वे यीस्ट कृत्रिम गुणसूत्र (YACs) कहलाते हैं। 3. फ्रीडरिक सेंगर ने एक सिद्धांत विकसित किया जिसके अनुसार DNA के यंत्रचालित DNA अनुक्रर्मों द्वारा अनुक्रमित होते हैं। DNA खण्डौं पर अतिव्यापत क्षेत्रों के आधार पर, ये अनुक्रम तदनुसार व्यवस्थित होते हैं। 4. इन अनुक्रमों के सरेखण के लिए, विशिष्ट कम्प्यूटर, आधारित कार्यक्रम विकसित किए गए हैं। अंततः एण्डोन्यूक्लिएज अभिज्ञान स्थल के आधार पर कुछ पुनरावृत्त DNA अनुक्रम और DNA बहुरूपता के बारे में सूचनाएँ एकत्र करके जीनोम का आनुवंशिक एवं भौतिक मानचित्रण कर लिया जाता है।