व्याख्या : मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम उन जीन्स पर लागू होता है जो असमजात गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं। स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम के अनुसार जब दो या अधिक लक्षण वंशागत होते हैं, व्यक्तिगत आनुवंशिक कारक, युग्मक निर्माण के समय एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से अपव्यहित होते हैं और साथ-साथ रहने पर भिन्न लक्षण उत्पन्न करते हैं। यह द्विसंकर संकरण द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है जो दो लक्षणों के लिए विभिन्न लक्षणों की अभिव्यक्ति करता है।
जब जीन्स अलग-अलग गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं, एक . जीन के एलील (A व a) दूसरे जीन के एलील्स (B व b) युग्मकों में स्वतंत्र रूप से पृथक्करण करेंगे। चार भिन्न प्रकार के युग्मक AB, aB, Ab, ab बराबर संख्या में निर्मित होंगे। लेकिन यदि दो जीन एक ही गुणसूत्र पर स्थित हैं वे सहलग्नता प्रदर्शित करेंगे तथा अर्द्धसूत्री विभाजन के दौरान साथ-साथ पृथक्करण करके दो प्रकार के युग्मक बनाएंगे।
समजात गुणसूत्र आकार में आवश्यक रूप से समान होते हैं पर यमज नहीं होते हैं। प्रत्येक समान क्रम में आनुवंशिक सूचनाएँ वहन करता है, परन्तु प्रत्येक लक्षण के एलील्स समान नहीं हो सकते। अतिरिक्त केन्द्रकीय आनुवंशिक तत्व (प्लाज्मिड भी कहलाते हैं) मातृ वंशागति के पैटर्न को दर्शाते हैं।