व्याख्या : पृथक्करण के नियम अथवा युग्मकों की शुद्धता के नियम के अनुसार, एक जोड़े के युग्मविकल्पी, युग्मक निर्माण के समय एक-दूसरे से पृथक् हो जाते हैं, अतः इस प्रकार एक युग्मक दो कारकों में से केवल एक ग्रहण करता है और किसी प्रकार का मिश्रण प्रदर्शित नहीं करता। अतः मेण्डल द्वारा प्रस्तुत सुझाव कि कारक किसी लक्षण को नियंत्रित करता है, अलग एवं स्वतंत्र रूप से वंशागत होता है, इस प्रेक्षण पर आधारित है कि अब दो विपर्यासी लक्षणों वाले पौधों के बीच संकरण कराए जाने पर बिना मिश्रित हुए सन्तान में केवल एक लक्षण को दर्शाते हैं।
मान लें कि जब एक पौधे के दो विपर्यासी लक्षणों (उदाहरण- बीज रंग एवं बीज आकृति-गोल पीला एवं झुरींदार हरा, नीचे दिए गए हैं), के बीच संकरण कराया जाता है, उनके प्रभावी लक्षणरूप लक्षण `F_1` पीढ़ी में अभिव्यक्त हुए और उनके अप्रभावी लक्षण `F_2` पीढ़ी में प्रकट हुए। इससे स्पष्ट है कि `F_1` पीढ़ी में मेण्डेलियन कारकों का कोई मिश्रण नहीं हुआ। लेकिन उनके साथ-साथ रहते हुए केवल एक लक्षण अभिव्यक्त हुआ। अत: युग्मक निर्माण के समय ये दोनों कारक पृथक् हो जाते हैं अथवा अप्रभावी प्रकार `F_2` पीढ़ी में प्रकट नहीं होगा।
`{:("लक्षणप्ररूप अनुपात :", "गोल :" ,"गोल : ","झुर्रीदार :"," झुर्रीदार"),( ,"पीला"," हरा ","पीला"," हरा"),(,9:,3:,3:,1):}`
जीनप्ररूप अनुपात 1: 2 : 2 : 4 : 1 : 2 : 1 : 2 : 1