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BIOLOGY
क्षुद्रांत्र में होने वाले अवशोषण एवं स्...

क्षुद्रांत्र में होने वाले अवशोषण एवं स्वांगीकरण के प्रक्रम को समझाइए।

लिखित उत्तर

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क्षुद्रांत्र में अवशोषण एवं स्वांगीकरण-क्षुद्रांत्र लगभग 7.5 मीटर लम्बी अत्यधिक कुंडलित नली होती है। यह यकृत एवं अग्न्याशय से स्त्राव प्राप्त करती है। इसके अतिरिक्त इसकी भित्ति से भी कुछ रस स्लावित होते हैं। आंशिक रूप से पचा भोजन क्षुद्रांत्र के निचले भाग में पहुँचता है जहाँ आंत्र रस पाचन क्रिया को पूर्ण कर देता है। पचा हुआ भोजन अवशोषित होकर क्षुद्रांत्र की भित्ति में स्थित रुधिर वाहिकाओं में चला जाता है। इस प्रक्रम को .अवशोषण. कहते हैं । क्षुद्रांत्र की आंतरिक भित्ति पर अंगुली के समान उभरी हुई संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें .दीर्घरोम. अथवा रसांकुर कहते हैं। ये दीर्घरोम पचे हुए भोजन के अवशोषण हेतु तल क्षेत्र बढ़ा देते हैं। प्रत्येक दीर्घरोम में सूक्ष्म रुधिर वाहिकाओं का जाल फैला रहता है। दीर्घरोम की सतह से पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है। अवशोषित पदार्थों का स्थानान्तरण रुधिर वाहिकाओं द्वारा शरीर के विभिन्न भागों तक होता है, जहाँ उनका उपयोग जटिल पदार्थों को बनाने में किया जाता है। इस प्रक्रम को .स्वांगीकरण. कहते हैं। कोशिकाओं में उपस्थित ग्लूकोस का विघटन ऑक्सीजन की सहायता से कार्बन डाई-आक्साइड एवं जल में हो जाता है और ऊर्जा मुक्त होती है। भोजन का वह भाग, जिसका पाचन नहीं हो पाता अथवा अवशोषण नहीं होता, बृहदांत्र में भेज दिया जाता
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