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BIOLOGY
मृदा किस प्रकार फसलों की किस्मों का निर्...

मृदा किस प्रकार फसलों की किस्मों का निर्धारण करती है? व्याख्या कीजिए।

लिखित उत्तर

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मृदा और फसलें-भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार की मृदा पायी जाती है। कुछ क्षेत्रों में मृण्मय मृदा, कुछ में बलुई, तो कुछ में दुमटी मृदा पायी जाती है |
पवन, वर्षा, ताप, प्रकाश और आर्द्रता द्वारा मृदा प्रभावित होती है। यह जलवायवी कारक मृदा परिच्छेदिका को प्रभावित करते हैं और मृदा संरचना में परिवर्तन लाते हैं। मूलतः जलवायवी कारक तथा मृदा के घटक सम्मिलित रूप से किसी क्षेत्र विशेष में उगने वाली वनस्पति तथा फसलों की किस्मों का निर्धारण करते हैं।
मृण्मय और दुमटी मृदा, दोनों ही गेहूँ और चने जैसी फसलों की खेती के लिए उपयुक्त होती हैं, क्योंकि इस मृदा की जलधारण क्षमता अच्छी होती है। धान के लिए, मृत्तिका एवं जैव पदार्थ से समृद्ध तथा अच्छी जल धारण वाली मृदा आदर्श होती है। मसूर और अन्य दालों के लिए दुमटी मृदा की आवश्यकता होती है, जिसमें से जल की निकासी आसानी से हो जाती है। कपास के लिए बलुई-दुमट अथवा दुमट मृदा अधिक उपयुक्त होती है, जिसमें से जल की निकासी आसानी से हो जाती है और जो पर्याप्त परिमाण में वायु को धारण करती है। गेहूँ जैसी फसलें महीन मृण्मय मृदा में उगाई जाती हैं, क्योंकि वह ह्यूमस से समृद्ध और अत्यधिक उर्वर होती है।
इस प्रकार स्पष्ट है कि मृदा ही यह निर्धारित करती है कि उसमें कौनसी फसल उगानी चाहिए और कौनसी नहीं।
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