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BIOLOGY
सूक्ष्मजीवों का प्रयोग रसायन उर्वरकों तथ...

सूक्ष्मजीवों का प्रयोग रसायन उर्वरकों तथा पीड़कनाशियों के प्रयोग को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। यह किस प्रकार सम्पन्न होगा? व्याख्या कीजिए।

लिखित उत्तर

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जैव नियन्त्रण (Bio Control)- पादप रोगों तथा .पीड़कों (pests) के नियन्त्रण के लिए जैविक विधि (biological methods) का प्रयोग ही जैव नियन्त्रण (bio control) है। पीड़क तथा रोगों का जैव नियन्त्रण (Biological Control of Pests and Diseases)-जैव नियन्त्रण विधि से विषाक्त रसायन तथा पीड़कनाशियों पर हमारी निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जीवाणु बेसीलस प्यूरिनजिएंन्सिस (Bacillus thuringiensis) के स्पोर्स बाजार में पैकिटों के रूप में उपलब्ध हैं। इन्हें पानी मिलाकर पौधों पर छिड़का जाता है, जिनके खाने से कीटों के लार्वा मर जाते हैं। वयस्क कोट पर इसका कोई प्रभाव नहीं होता। इस जीवाणु की जीन द्वारा आनुवंशिक अभियान्त्रिकी के प्रयोग से कोटरोधी Bt फसलें भी बनायी गयी हैं। ड्रेगनफ्लाई का उपयोग मच्छरों के नियन्त्रण में, लेडी बर्ड का एफिड्स के नियन्त्रण में होता है।
जैव वैज्ञानिक नियन्त्रण के तहत कवक ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) का उपयोग पादप रोगों के नियन्त्रण में किया जाता है। यह बहुत-से पादप रोगजनकों का प्रभावशील जैव नियन्त्रण कारक है।
बैक्यूलोवायरस (Baculoviruses) ऐसे रोगजनक है जो कीटों तथा सन्धिपादों (आर्थोपोड्स) पर हमला करते है। अधिकांश बैक्यूलोवायरंसिस जो जैव वैज्ञानिक नियन्त्रण कारकों की तरह प्रयोग किए जाते हैं, वे न्यूक्लियोपॉलिहेड्रोवायरस (nucleopolyhedrovirus) प्रजाति के अन्तर्गत आते हैं। यह विषाणु प्रजाति-विशेष, सँकरे स्पेक्ट्रम कीटनाशीय उपचारों के लिए अति उत्तम मानी जाती है।
जैव उर्वरक के रूप में सूक्ष्मजीव Microbes as biofertilizers)-जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं। लेग्यूमिनस पादपों की जड़ों पर स्थित ग्रंथियों का निर्माण राइजोबियम (Rhizobium) जीवाणु के सहजीवी सम्बन्ध द्वारा होता है। ये जीवाणु वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत करते हैं। मृदा में मुक्तावस्था में रहने वाले अन्य जीवाणु जैसे एजोस्पाइरिलम (Azospiritlum) तथा एजोटोजैक्टर (Axotobacter) भी वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर मृदा में नाइट्रोजन अवयव की मात्रा को बढ़ाते हैं।
कवक अनेक पादपों के साथ सहजीवी सम्बन्ध स्थापित करते हैं। इस सम्बन्ध को माइकोराइजा (Mycorrhiza) कहते हैं। ग्लोमस (Glomus) जीनस के बहुत-से कवक सदस्य माइकोराइजा बनाते हैं। इस सम्बन्ध में कवकीय सहजीवी मृदा से जल एवं पोषक तत्वों का विशेषत: फॉस्फोरस का अवशोषण कर पादपों को प्रदान करते हैं और पादपों से भोजन प्राप्त करते हैं।
सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria) स्वपोषित सूक्ष्मजीव हैं जो जलीय तथा स्थलीय वायुमण्डल में विस्तृत रूप से पाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को नाइट्रोजनं यौगिकों के रूप में स्थिर करके मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं, जैसे-एनाबीना. (Anabaend), नॉस्टॉक (Nostoc) आदि। धान के खेत में सायनोबैक्टीरिया महत्त्वपूर्ण जैव उर्वरक की भूमिका निभाते हैं।
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