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BIOLOGY
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लिखित उत्तर

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वैज्ञानिकों ने 1898 में जीवों के नामकरण हेतु एक अन्तर्राष्ट्रीय आयोग का गठन किया। 1901 में इस आयोग ने नामकरण के लिए एक अन्तर्राष्ट्रीय सिद्धान्त को स्वीकार किया और 1904 में इसे प्रकाशित किया गया। इसमें नामकरण की अन्तर्राष्ट्रीय संहिता (नियमों) को मान्यता दी गई। इसके प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं
(1) प्राणी या पौधे के वैज्ञानिक नाम लैटिन भाषा से व्युत्पन्न होने चाहिए।
(2) द्विपदनाम पद्धति के अनुसार प्रत्येक जीवधारी के दो नाम होते हैं-वंश नाम तथा जाति नाम।
(3) वंश नाम का प्रथम अक्षर अंग्रेजी के बड़े अक्षर से तथा जाति नाम का पहला अक्षर अंग्रेजी के छोटे अक्षर से लिखा जाता है।
(4) वैज्ञानिक नाम सदैव तिरछे अक्षरों (italic), में लिखा जाता है।
(5) वंश या जाति का नाम एक बार रखने के पश्चात् बदला नहीं जाता।
(6) उपजाति का नाम सदैव जाति के नाम के पश्चात् आता है, इस कारण इसे त्रिपदनाम कहते हैं।
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