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BIOLOGY
दीर्घ पोषक तत्वों एवं लघु पोषक तत्त्वों ...

दीर्घ पोषक तत्वों एवं लघु पोषक तत्त्वों में क्या अन्तर है? सल्फर, पोटैशियम, मैग्नीशियम एवं जिंक तत्त्वों की कमी से उत्पन्न लक्षणों का वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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अनिवार्य पोषक तत्त्व -जो तत्त्व वृद्धि तथा परिवर्धन के लिए आवश्यक होते हैं, अनिवार्य पोषक तत्त्व कहलाते हैं। इनको दो समूहों में वर्गीकृत किया जाता है-
(क) वृहत् या दीर्घमात्रा पोषक तत्त्व
(ख) सूक्ष्म या लघुमात्रा पोषक तत्त्व।
(क) वृहत् या दीर्घमात्रा पोषक तत्त्व -ये पौधों के शुष्क पदार्थ की 1 से 10 मिलीग्राम/लीटर की सान्द्रता में पाए जाते हैं, जैसे-कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, पोटैशियम, कैल्सियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, सल्फर, आयरन, मैग्नीशियम। इनमें से कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन वायुमण्डल से प्राप्त होते हैं तथा शेष मृदा से प्राप्त होते है।
(ख) सूक्ष्म या लघुमात्रा पोषक तत्त्व -ये पौधों के शुष्क पदार्थ की 0.1. मिलीग्राम/लीटर की सान्द्रता या उससे कम मात्रा में पाए जाते हैं, जैसे-क्लोरीन, बोरॉन, मैंगनीज, जिंक, ताँबा, निकिल, मॉलिब्डेनमा
पौधों में बोरॉन तत्त्व का महत्त्व -(1) पौधे इसे टेट्राबोरेट व बोरेट के रूप में .ग्रहण करते हैं।
(2) यह `Ca^(++)` के अवशोषण, इसके उपयोग, झिल्लियों के कार्य, परागकणों के अंकुरण, कोशा विवर्धन तथा शर्करा स्थानान्तरण में आवश्यक होता है।
(3) इसकी कमी से जड़ों का विकास कम होता है। पुष्पों की संख्या तथा आकार छोटा रह जाता है।
(4) पत्तियों में कर्लिंग हो जाती है।
पौधों में मैंगनीज का महत्त्व -(1) यह पर्णहरित संश्लेषण के लिए आवश्यक तत्त्व है।
(2) यह एन्जाइम की सक्रियता के लिए आवश्यक होता है।
(3) यह तत्त्व क्लोरीन के साथ मिलकर प्रकाश संश्लेषण क्रिया में जल के प्रकाश अपघटन में भाग लेता है।
(4) इसकी कमी से क्लोरोसिस हो जाती है।
पौधों में जिंक का महत्त्व -(1) यह मृदा में बहुत कम पाया जाता है। पौधे इसे बाइवेलैन्ट के रूप में ग्रहण करते हैं।
(2) जिंक अनेक एन्जाइम्स का सक्रिय कारक होता है। यह प्रोटीन के संश्लेषण में सहायक होता है।
(3) इसकी कमी से पौधे के कायिक भाग ठीक से वृद्धि नहीं करते। पत्तियां विकृत हो जाती हैं। वृद्धि करने वाला भाग सूखने लगता है। पौधे बौने रह जाते हैं। फल छोटे रह जाते हैं।
खनिजों की न्यूनता के लक्षण
सल्फर की कमी - विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 4 के अन्तर्गत देखिए।
पोटैशियम की कमी -इसके, अभाव में प्रोटीन संश्लेषण रुक जाता है। कोशिकाओं में कार्बनिक नाइट्रोजिनस यौगिक एकत्र होने लगते हैं। श्वसन क्रिया तीव्र हो जाती है। पत्तियाँ मुरझाकर पीली पड़ जाती है। पत्तियों के किनारे झुलस जाते हैं। यान्त्रिक ऊतक कम विकसित होता है। पौधे झाड़ीनुमा हो जाते हैं।
मैग्नीशियम की कमी -इसके अभाव में क्लोरोफिल का संश्लेषण नहीं होता। पत्तियों में क्लोरोसिस रोग हो जाता है। पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं। पत्तियों पर पीले धब्बे दिखने लगते हैं अन्तत: पत्ती मृत हो जाती है।
जिंक की कमी -इसकी कमी से पत्तियाँ विकृत हो जाती हैं। पौधे बौने रह जाते हैं। पौधे के वृद्धि भाग सूखने लगते हैं।
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