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जैव-विकास से आप क्या समझते है? आकारिकी ए...

जैव-विकास से आप क्या समझते है? आकारिकी एव कार्यकी से प्राप्त परमानो द्वारा जैव-विकास की पुष्टि कीजिए!

लिखित उत्तर

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जैव विकास को प्रमाणित करने के लिए अनेकानेक प्रमाण (evidences) दिए जाते हैं। आकारिकी तथा कार्यिकी से जैव विकास निम्नलिखित प्रकार से प्रमाणित होता है (I) आकारिकी से जैव विकास के प्रमाण (Evidences of Organic Evolution from Morphology) जन्तुओं की आकारिकी का अध्ययन तथा उनकी परस्पर तुलना करने से ज्ञात होता है कि विभिन्न जन्तुओं में एक कार्य को करने के लिए विकसित विभिन्न प्रकार के अंगों में समवृत्तिता (analogy) होती है, जबकि एक ही उत्पत्ति के अंग भिन्न-भिन्न जन्तुओं में आवश्यकतानुसार भिन्न-भिन्न आकार-प्रकार के होकर विभिन्न कार्यों को सम्पन्न करते हैं। इसे समजातता (homology) कहते हैं। (i) समजात अंग (Homologous organs)-कुछ संरचनाएँ ऐसी होती हैं जो उत्पत्ति तथा मूल रचना में तो समान होती हैं, परन्तु कार्य के अनुसार उनकी बाह्य रचना में भिन्नता आ जाती है। ऐसी संरचनाओं को समजात अंग तथा उनकी इस समानता को समजातता (hormology) कहते हैं। उदाहरण के लिए-सील के फ्लीपर, पक्षी के पंख, चमगादड़ के पंख, घोड़े की अंगली टाँग तथा मनुष्य के हाथ की उत्पत्ति तथा मूल रचना में समजातता होती है, क्योंकि इन सभी में ह्यूमरस, रेडियो-अल्ना, कार्पल्स, मेटाकार्पल्स तथा अंगुलास्थियों (phalanges) होती हैं।

कशेरुकियों की उपर्युक्त संरचनाएँ अलग-अलग कार्यों के लिए अनुकूलित होती हैं अत: आकृति में ये एक-दूसरे से भिन्न होती हैं। सील का फ्लीपर तैरने के लिए, पक्षी तथा चमगादड़ के पंख उड़ने के लिए, घोड़े की टाँग दौड़ने के लिए तथा मनुष्य का हाथ वस्तु पंकड़ने के लिए अनुकूलित होता है। इस प्रकार की समानता, निश्चय ही, अन्य अंग तन्त्रों में भी मिलती है। अन्य उदाहरणों के रूप में तन्त्रिका, पेशी, श्वसन, परिवहन तन्त्रों में भी इस प्रकार की समजातता देखी जा सकती है। समजातता (Homology) अपसारी जैव विकास को प्रदर्शित करती है अर्थात् जातियों का विकास समान पूर्वजों से होता है।
(ii) समवृत्ति अंग (Analogous organs)-वे अंग जो समान कार्य करते हैं, परन्तु उत्पत्ति एवं मूल रचना में भिन्न होते हैं, समवृत्ति अंग (analogous organs) कहलाते हैं। इनकी इस समरूपता को समवृत्तिता (analogy) कहते हैं। उदाहरण-कीटों, विलुप्त सरीसृप टेरोडैक्टाइल, पक्षियों तथां चमगादड़ के पंख उड़ने का कार्य करते हैं, परन्तु ये उत्पत्ति तथा मूल संरचना में भिन्न होते हैं। जैसे कीटों के पंख काइटिन से बने होते हैं, टेरोडैक्टाइल में ये धड़ तथा पश्चपाद के मध्य फैली त्वचा से बने होते हैं। पक्षियों के पंख परों (feathers) से बने होते हैं, जबकि चमगादड़ में ये झिल्लीनुमा त्वचा के भंज (fold) से बना पैटेजियम (patagium) होता है। इसी प्रकार मछलियों के पख (fins) तथा जलीय स्तनियों जैसे व्हेल, सील आदि के चप्पू तैरने के लिए उपयोजित होने के कारण एक जैसे दिखाई देते हैं। वास्तव में मूल रचना में इन अंगों में अत्यधिक भिन्नता होती है। अत: ये समवृत्ति अंग हैं। समवृत्तिता अभिसारी जैव विकास (convergent evolution) को प्रमाणित करती है अर्थात् जातियों का विकास अलग-अलग पूर्वजों से होता है।

कार्यिकी से जैव विकास के प्रमाण
(Evidences of Organic Evolution from Physiology)
विभिन्न प्रकार के जीवों की शारीरिक क्रियाओं का अध्ययन तुलनात्मक रूप में किया जाए तो पता चलता है कि इनमें अत्यधिक समानता है। उदाहरण के लिए सभी जीवधारियों के जीवद्रव्य की मूल संरचना समान होती है। आनुवंशिक पदार्थ D.N.A. अथवा R.N.A., ऊर्जा स्थानान्तरण अणु ATP, श्वसन एन्जाइम सांइटोक्रोम की संरचना में समानता मिलती है। प्राणियों के पाचन तन्त्र में प्रयुक्त पाचक रसों (digestivejuices) में जो प्रोटीन पाचक (proteolytic), वसापाचक (lipolytic) तथा कार्बोहाइड्रेट पाचक (amylytic) एन्जाइम्स (enzymes) होते हैं, वे समान होने के साथ-साथ एक ही निश्चित क्रम में भोजन पर क्रिया करते हैं। इसी प्रकार कशेरुकी प्राणियों की अन्तःस्त्रावी ग्रन्थियों (endocrine glands) से स्रावित हॉर्मोन्स रासायनिक संरचना तथा कार्यों में समान होते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि इन जन्तुओं का विकास समान पूर्वजों से हुआ है। शरीर में उपस्थित विभिन्न प्रकार के जैव-रसायनों के तुलनात्मक अध्ययन से यह भी ज्ञात होता है कि इन जीवों का विकास समान पूर्वजों से हुआ है। उदाहरण के लिए-कशेरुकियों के रुधिर की संरचना समान होने के साथ-साथ लाल रुधिर कणिकाओं में उपस्थित हीमोग्लोबिन (haemoglobin) के क्रिस्टल (crystals) बनाकर रीचर्ट व ब्राउन (Reichert and Brown) ने अध्ययन किया तो पाया कि मनुष्य के हीमोग्लोबिन के क्रिस्टल चिम्पैन्जी (कपि) के क्रिस्टल से मिलते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मनुष्य तथा कपियों का विकास सह-पूर्वजों से हुआ है।
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