Home
Class 12
BIOLOGY
बीजों में प्रसुप्ति के कारणों पर प्रकाश ...

बीजों में प्रसुप्ति के कारणों पर प्रकाश डालिए।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

जैव विकास के साथ-साथ जैसे-जैसे नई जातियों का विकास होता जाता है वैसे-वैसे ही परानी जातियाँ विलप्त होती जाती हैं। प्रत्येक जाति का अन्तिम भाग्य (ultimate fate) विलुप्ति ही है। रोमर (Romer) का अनुमान है कि अब तक उत्पन्न कुल जातियों में से केवल 1% के ही वंशज आज जीवितं हैं, बाकी सब विलुप्त हो चुके हैं।
विलुप्ति के कारण
(Causes of Extinction) ,
जातियों की विलुप्ति के अनेक कारण हैं। इनमें से कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं 1. भू-भाग व जलवायु में परिवर्तन (Changes in geography and climate)-पृथ्वी की जलवायु तथा भू-भाग में परिवर्तन होने से वहाँ उपस्थित जातियों में अनुकूलन के कारण नई जाति.का निर्माण होता है या फिर वह जाति विलुप्त हो जाती है।
2. अन्य जातियों से प्रतिद्वन्द्विता (Competition with other species)-अनेक जातियाँ दूसरी नई विकसित जातियों से प्रतिद्वन्द्विता में हार कर विलुप्त हो जाती हैं। नई बनी जातियाँ वातावरण से अधिक अनुकूलित होती हैं। कभी-कभी भौगोलिक क्षेत्रों में परिवर्तन के कारण एक स्थान पर विकसित हुई जाति दूसरे स्थान पर पहुँच कर वहाँ को मूल जाति (native species) को संघर्ष में नष्ट कर देती है जैसे जब स्तनियों का विकास प्रारम्भ हुआ था, उस समय ऑस्ट्रेलिया व एशिया एक ही भू-भाग थे, किन्तु यूथीरिया (eutheria) का विकास होने से पूर्व ही ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप एशिया से अलग हो गया। एशिया में उच्च स्तनियों (यूथीरिया) का विकास हुआ। इनसे संघर्ष में प्रोटोथीरिया (prototheria) तथा मेटाथीरिया (metatheria) नष्ट होते गए व उनका स्थान नए विकसित यूथीरियन्स (eutherians) ने ले लिया। ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप क्योंकि यूथीरियन्स के विकास से पहले ही मुख्य भू-भाग से अलग हो गया था। अत: वहाँ यूथीरियन्स का विकास नहीं हुआ और आज भी प्रोटोथीरिया व मेटाथीरिया पाए जाते हैं। यद्यपि मानव के क्रियाकलापों से अब ये धीरे-धीरे नष्ट होते जा रहे हैं। 3.आवश्यकता से अधिक विशिष्टता (Overspecialization)-जब किसी जाति का विकास होता है, तब इसमें अनेक अनुकूलन इसकी उत्तरजीविता के लिए उत्पन्न होते हैं। अनुकूलनंता के कारण जीवधारी अपने वातावरण में सफलतापूर्वक रहते हैं। कभी-कभी कुछ संरचनाओं की अतिविशिष्टता (overspecialization) जातियों की विलुप्ति का कारण बन जाती हैं, जैसे (i) आइरिश बारहसिंगे (Irish elk) के सींग उसकी आत्मरक्षा के लिए थे, किन्तु इनका आकार धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि ये झाड़ियों में फंस जाते थे और अन्ततः ये बारहसिंगे के विनाश का कारण बन गए।
(ii) इसी प्रकार मांसभक्षी स्वेडलॉन (Saber toothed tiger-Swedelon) के कैनाइन्स दन्त धीरे-धीरे इतने बड़े हो गए कि वे भोजन ग्रहण करने में बाधा डालने लगे। अन्त में यह जाति विलुप्त हो गई।
4. मानव गतिविधियाँ (Activities of man)-आजकल मानव की गतिविधियाँ ही अधिकांश जातियों की. विलुप्ति का कारण बन रही हैं। मानव गतिविधियाँ दो प्रकार से जातियों की विलुप्ति के लिए उत्तरदायी हैं
(i) प्रत्यक्ष कारण (Direct causes). मानव ने अपनी आवश्यकताओं व मनोरंजन के लिए अनेक जातियों का अंधाधुंध शिकार किया जिस कारण से ये जातियाँ विलुप्त हो गईं, जैसे-डोडो (dodo) पक्षी। अनेक जीवधारी जैसे कछुए, चीता, घड़ियाल आदि विलुप्त होने की दिशा में अग्रसर हैं।
(ii) अप्रत्यक्ष कारण (Indirect causes)-कुछ जातियाँ मानव की अप्रत्यक्ष गतिविधियों के कारण नष्ट हो रही हैं। जंगलों को काटकर खेती करने से अनेक जन्तु और पौधों की दुर्लभ जातियाँ विलुप्त हो गई हैं। मानव की लापरवाही के कारण जंगलों में लगी आग से अनेक पादप व जन्तु जातियाँ विलुप्त हो जाती हैं। मानव द्वारा अपने लाभ की किसी जाति का प्रवेश दूसरे आवास में करा दिया जाता है जिससे वहाँ की आदिम जाति समाप्त हो जाती है जैसे ऑस्ट्रेलिया में मानव द्वारा पहुँचाए गए यूथीरियन स्तनियों ने वहाँ के आदिवासी मेटाथीरिया व प्रोटोथीरिया स्तनियों को समाप्त करना प्रारम्भ कर दिया है।
इस प्रकार जाने-अनजाने में मानव की गतिविधियों से अनेक जीव जातियाँ विलुप्त हो जाती हैं।
प्रलयकारी भौगोलिक घटनाएँ
(Cataclysm Geographical Revolutions)
पृथ्वी की भौमिक समय सारणी के अध्ययन से ज्ञात होता है कि पृथ्वी पर समय-समय पर अनेक भौगोलिक परिवर्तन हुए हैं जिन्हें महाक्रान्ति (great revolution) कहते हैं। प्रत्येक महाकल्प की समाप्ति महाक्रान्ति के साथ हुई है। इससे जीवों की व्यापक विलुप्ति हुई है। कुछ प्रलयकारी घटनाएँ निम्नवत् हैं.
1. महाद्वीपों का अपवहन (Continental drift)-भूपटल की प्लेटों के परस्पर एक-दूसरे पर फिसलने या टकराने के कारण महाद्वीपों का अपवहन हुआ है। पृथ्वी पर आज से लगभग 3760 लाख वर्ष पूर्व, 1800 लाख वर्ष पूर्व, 1350 लाख वर्ष पूर्व भौगोलिक उथल-पुथल हुई है! अन्तिम उथल-पुथल जुरैसिक काल में लगभग 1350 लाख वर्ष पूर्व हुई। इसके फलस्वरूप आज पाए जाने वाले महाद्वीपों का उद्भव हुआ है। प्रत्येक उथल-पुथल के कारण अनेक जीव-जातियाँ विलुप्त हो जाती हैं।
2. उल्कापिण्ड अवपात (Falling of meteorites)----पृथ्वी पर उल्कापिण्ड. गिरते रहते हैं। इनमें से अधिकांश का कोई प्रभाव नहीं होता। जुरैसिक काल के पहले क्रिटेशियस कल्प के अन्त में कुछ बड़े उल्कापिण्डों के पृथ्वी पर टकराने से अनेक जीव-जातियाँ विलुप्त हो गईं।
3. तारककाय अवपात (Falling of asteroids)--लगभग 3250 लाख वर्ष पूर्व डेवोनियन कल्प में विशालकाय तारककाय के पृथ्वी पर टकराने से इतनी धूल उड़ी कि वर्षों तक सूर्य की किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुँच सकी और पृथ्वी से अनेक जीव-जातियों की सामूहिक विलुप्ति हुई।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • विकास

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (लघु उत्तरीय प्रश्न (Type-l))|47 Videos
  • विकास

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (लघु उत्तरीय प्रश्न (Type-Il))|27 Videos
  • विकास

    CHITRA PUBLICATION|Exercise NCERT ZONE (NCERT जीव विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Biology Exemplar LO Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर) (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न )|1 Videos
  • वंशागति तथा विविधता के सिद्धान्त

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (बहुविकल्पीय प्रश्न)|32 Videos
CHITRA PUBLICATION-विकास -अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न )
  1. पारितंत्र के कौन-कौन से मुख्य घटक है?

    Text Solution

    |

  2. विकास के कारणों को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

    Text Solution

    |

  3. बीजों में प्रसुप्ति के कारणों पर प्रकाश डालिए।

    Text Solution

    |

  4. सरल आवर्त गति की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

    Text Solution

    |

  5. प्राणियों के विलुप्तीकरण से आप क्या समझते हैं? इसके कारण लिखिए।

    Text Solution

    |

  6. पेट्रोलियम की उत्पत्ति किस प्रकार होती है ? समझाइये।

    Text Solution

    |

  7. ग्लाइकोलिसिस प्रक्रिया का वर्णन कीजिए|

    Text Solution

    |

  8. प्रकृति में नयी जाति की उत्पत्ति कैसे होती है?

    Text Solution

    |

  9. समजातता की परिभाषा दोजिए। यह किस प्रकार समवृत्तिता से भिन्न है? इसका ज...

    Text Solution

    |

  10. पृथक्करण की परिभाषा लिखिए। जीव-जाति की उत्पत्ति में इसकी भूमिका का संक...

    Text Solution

    |

  11. जीवाश्म क्या है? जीवाश्म के प्रकार एवं जीवाश्म निर्माण प्रक्रिया का वर...

    Text Solution

    |

  12. लवण क्या हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं?

    Text Solution

    |

  13. उत्परिवर्तन किसे कहते हैं?

    Text Solution

    |

  14. उत्परिवर्तन पर उदाहरण सहित टिप्पणी कीजिए।

    Text Solution

    |

  15. माइकोराइजा किसे कहते हैं? इसके महत्त्व पर प्रकाश डालिए।

    Text Solution

    |

  16. समजात एवं समरूप अंगों की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

    Text Solution

    |

  17. उत्परिवर्तन क्या है? स्वजात तथा प्रेरित उत्परिवर्तन का वर्णन कीजिए।

    Text Solution

    |

  18. उत्परिवर्तन की परिभाषा दीजिए। उत्परिवर्तन सिद्धान्त किसने प्रतिपादित क...

    Text Solution

    |

  19. डार्विन के अनुसार जैव विकास केसे हुआ? जेव विकास का आधुनिक संश्लेषणात्म...

    Text Solution

    |

  20. जैव विकास के समर्थन में कोई चार प्रमाण दीजिए।

    Text Solution

    |