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BIOLOGY
समजातता की परिभाषा दोजिए। यह किस प्रकार ...

समजातता की परिभाषा दोजिए। यह किस प्रकार समवृत्तिता से भिन्न है? इसका जैव विकास में क्या महत्त्व है।

लिखित उत्तर

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पृथक्करण
(Isolation)
जैव विकास को समष्टि (population) के आधार पर समझाया गया है। इस सन्दर्भ में समष्टि की जातियाँ कुछ क्रियाओं के कारण छोटी-छोटी इकाइयों में बँट जाती हैं। इससे उनमें आपसी वंशागत लक्षण भी अलग-अलग विकसित होते हैं। इस प्रकार से समूहों में बँटने को पृथक्करण (isolation) कहते हैं।
पृथक्करण निम्नलिखित दो प्रकार का होता है
(I) भौगोलिक पृथक्करण तथा (II) जननिक पृथक्करण! (I) भौगोलिक पृथक्करण. (Geographical Isolation) - यह पृथक्करण भौगोलिक (geographical) कारणों से जैसे पर्वत, वन, समुद्र, रेगिस्तान आदि के कारण होता है। दूरियाँ, . जलवायु, ऋतुएँ तथा वातावरण (environment) पृथक्करण के लिए उपयोगी साधन हैं जिससे आबादियों में आपसी सम्पर्क समाप्त हो जाता है और वे अलग-अलग समूहों में बँटकर नई जातियों के रूप में विकसित होती रहती हैं। जैसे ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप कभी एशिया से जुड़ा हुआ था। क्रिटेशियस युग (Cretaceous period) में ऑस्ट्रेलिया एशिया से पृथक् हो गया। इस समय प्रोटोथीरिया तथा मेटाथीरिया (prototheria and metatheria):स्तनियों का आधिपत्य था। पृथक् होने के पश्चात् एशिया में यूथीरिया स्तनियों का विकास हुआ, इन्होंने एशिया महाद्वीप से प्रोटोथीरिया, मेटाथीरिया जन्तुओं को नष्ट कर दिया। ऑस्ट्रेलिया विकास 1263 महाद्वीप में प्रोटोथीरिया, मेटाथीरिया जन्तुओं का विकास होता रहा। ये आज भी ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में पाए जाते हैं, अन्यत्र कहीं नहीं पाए जाते। ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में पाए जाने वाले यूथीरिया प्राणी मनुष्य द्वारा वहाँ पहुँचाए गए हैं। समान जलवायु वाले ऐसे भूखण्डों के जीव-जन्तु जो अनेक भौगोलिक अवरोधों (geographical barriers) द्वारा पूर्णत: ते हैं, किन्त समान जातियों के नहीं होते। उदाहरण के लिए—दक्षिणी अमेरिका तथा अफ्रीका में समान जलवायु तथा वातावरणीय दशाएँ हैं, किन्तु जीवों की जातियाँ बिल्कुल भिन्न-भिन्न हैं। दूसरी ओर अफ्रीका के अनेक जीव यूरोप तथा एशिया महाद्वीपों से मिलते हैं। कारण स्पष्टतः पृथक्करण तथा भौगोलिक परिस्थितियों में जैव विकास से सम्बन्धित है।
किसी समय यूरोप-एशिया-अफ्रीका सभी एक भूखण्ड के रूप में थे। इन पर उपस्थित जीवों में समानता होना इससे स्पष्ट होता है, जबकि दक्षिणी अमेरिका अलग भूखण्ड था।, अत: दोनों भूखण्डों पर विकास का क्रम तथा विकसित होने वाली जातियों के एक होने का प्रश्न ही नहीं है। (II) जननिक पृथक्करण (Reproductive Isolation) ।
. जब दो जातियों के सदस्यों में साथ-साथ रहते हुए भी आपस में प्रजनन नहीं होता तो इसे जननिक पृथक्करण (reproductive isolation) कहते हैं। जननिक पृथक्करण के फलस्वरूप जातियों की विशिष्टता बनी रहती है।
जैव विकास में जननिक पृथक्करण का बहुत महत्त्व है 1. यह जाति निर्माण में सहायक होता है। 2. दो जातियों के अस्तित्व को बनाए रखने में सहायक होता है।
1. जाति निर्माण में सहायक (Helpful in species formation)-यदि दो भिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाली आबादियों में विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं और यदि उनके बीच प्रजनन होता रहे, तब ये सभी विभिन्नताएँ लुप्त हो जाएँगी और नई जाति का विकास नहीं हो पाएगा। जब तक दो आबादियों के बीच जननिक पृथक्करण उत्पन्न नहीं होगा, तब तक नई जातियों का निर्माण नहीं हो सकेगा!
2. जातियों के अस्तित्व को बनाए रखने में सहायक (Helpful in maintaining the existence of species)—यदि दो भिन्न जातियों के सदस्यों के बीच प्रजनन होने लगे, तब उनके बीच की भिन्नता धीरे-धीरे समाप्त होने लगेगी तथा अन्तत: दोनों जातियाँ एक हो जाएँगी, इसलिए जातियों का अस्तित्व बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि उनके बीच प्रजनन न हो। यह तभी सम्भव है जब उनके बीच किसी प्रकार का जननिक पृथक्करण हो।
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