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BIOLOGY
जीवाश्म क्या है? जीवाश्म के प्रकार एवं ज...

जीवाश्म क्या है? जीवाश्म के प्रकार एवं जीवाश्म निर्माण प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। जैव विकास में जीवाश्म के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।

लिखित उत्तर

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जीवाश्म
(Fossils) प्राचीनकालीन जीवों के अवशेष, जो प्राचीनकाल में इस पृथ्वी पर निवास करते थे और बाद में विलुप्त हो गए, हमें भूपटल की चट्टानों में परिरक्षित मिलते हैं। इन्हें जीवाश्म (fossils) कहते हैं। जीवाश्मों के अध्ययन को जीवाश्म विज्ञान (Palaeontology) कहते हैं। जीवाश्म जैव विकास के सशक्त प्रमाण हैं। इससे विभिन्न युगों में पाए जाने वाले जीवों का ज्ञान होता है। पृथ्वी में जीवाश्म , .भूवैज्ञानिक रिकॉर्ड. (geological record) के रूप में संरक्षित हैं।
जीवाश्मों के प्रकार (Types of Fossils)
जीवाश्मीकरण की विधि के आधार पर जीवाश्म निम्नलिखित प्रकार के होते हैं--- 1.अपरिवर्तित जीवाश्म (Unaltered fossils)-बर्फ या अम्बर में जीवों के शरीर ज्यों-के-त्यों संरक्षित हो जाते हैं जैसे ध्रुवों पर बर्फ में दबें विशालकाय स्तनियों के जीवाश्म तथा अम्बर में, दबे कीट पतंगों के जीवाश्म। .
2. प्रस्तरीकृत जीवाश्म (Petrified fossils)-.-ये जीवधारियों के कठोर भागों के जीवाश्म होते हैं, जैसे—कंकाल, बाह्य कंकाल के भाग। इनमें कार्बनिक पदार्थों का स्थान चूना, सिलिका आदि खनिज पदार्थों द्वारा ले लिया जाता है। प्रस्तरीकृत जीवाश्मों से अस्थियों आदि की आन्तरिक संरचना का अध्ययन भी किया जा सकता है।
3.साँचा जीवाश्म (Mould fossils)—इसमें जीवधारी के शरीर का कोई भाग परिरक्षित नहीं होता। केवल इनकी आकृति के साँचे मिलते हैं। कभी-कभी साँचे में खनिज से बना जीवधारी भी बाह्य रचना को प्रदर्शित करता कास्ट (cast) में मिल जाता है।
4. ठप्पा जीवाश्म (Print fossils)-चट्टानों पर जीवधारी के शरीर की संरचना की छाप होती है, जैसे—विलुप्त पादपों की पत्तियों, पक्षियों के पंखों आदि की छाप-युक्त जीवाश्म।
5.कोपरोलाइट (Coprolite)-यह विलुप्त प्राणियों के शरीर के साथ पाए जाने वाला विष्ठा का जीवाश्म है। इससे विलुप्त प्राणी के पोषण स्वभाव का ज्ञान होता है। चट्टानों के प्रकार तथा जीवाश्म निर्माण प्रक्रिया (Types of Rocks and Formation of Fossils)
खनिज पदार्थों से बने भूपटल पर तीन प्रकार की चट्टानें पायी जाती हैं
1. आग्नेय चट्टानें (Igneous rocks)-ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा ठण्डा होकर आग्नेय चट्टानें बनाता है। इनमें जीवाश्म नहीं होते।
2. तलछटी या स्तरित चट्टानें (Stratified rocks)—ये समुद्रों में तलछट (sediment) के एकत्र होने से बनती हैं। तलछट का अधिकांश भाग नदियाँ पहाड़ों से लाती हैं। प्राचीनकालीन जीवधारी इस तलछट में दबकर स्तरित चट्टानों में परिरक्षित हो जाते हैं। इनमें समुद्री तथा स्थलीय और अलवणीय जन्तु होते हैं, जो नदियों के जल के साथ बहकर समुद्रों में पहुँचते रहते हैं। प्राकृतिक उथल-पुथल के कारण हजारों लाखों वर्षों में बनी ये चट्टानें पृथ्वी पर धुंसकर समुद्र में डूब जाती हैं और कहीं-कहीं उभरकर पर्वत श्रृंखलाएँ बना लेती हैं। हिमालय, आल्पस आदि चट्टानें आदिकाल में समुद्र में ही बनी थीं, सबसे अधिक जीवाश्म स्तरित चट्टानों से ही प्राप्त होते हैं।
3. रूपान्तरित चट्टानें (Modified rocks)-आग्नेय या स्तरित चट्टानें ऊष्मा, दबाव, भार एवं भौतिक गति के कारण रूपान्तरित हो जाती हैं, जैसे-संगमरमर, स्लेट आदि। इनमें रूपान्तरण प्रक्रिया के कारण जीवाश्म नष्ट हो जाते हैं।
जीवाश्म निर्माण प्रक्रिया (Mechanism of fossil formation)—प्रस्तरीकृत जीवाश्मों की निर्माण प्रक्रिया जटिल होती है। मृत्यु के पश्चात् जन्तुओं के कोमल भाग सड़-गल जाते हैं या अन्य मांसाहारियों द्वारा खा लिए जाते हैं। इनके कठोर भाग तलछट में दब जाते हैं। प्राणी के कोमल भाग से कार्बनिक पदार्थ धीरे-धीरे समाप्त होते जाते हैं और इनका स्थान खनिज पदार्थ लेते रहते हैं और अन्ततः प्राणी का कठोर भाग अकार्बनिक पदार्थों से बना पत्थर सदृश दिखाई देने लगता है, इसे प्रस्तरीकृत जीवाश्म कहते हैं। प्रस्तरीकृत जीवाश्म का रासायनिक शोधन करने के पश्चात् आन्तरिक संरचना का अध्ययन भी किया जा सकता है। जीवाश्म की आयु का निर्धारण (Determination of the Age of Fossils)
जीवाश्म का महत्त्व (Importance of Fossils)
जीवाश्म जिन चट्टानों से प्राप्त होते हैं, उन चट्टानों की आयु ज्ञात करके इस बात का अनुमान लगाया जाता है कि ये जीवधारी पृथ्वी पर किस काल में पाए जाते थे। जीवाश्मों से पूर्ण शरीर संरचना की कल्पना करके यह निश्चित किया जाता है कि किस प्रकार के जीवधारी किस काल में निवास करते थे। अत: जीवाश्मों से जैव विकास प्रमाणित होता है।
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