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BIOLOGY
मानव में होने वाले यौन संचारित रोगों का ...

मानव में होने वाले यौन संचारित रोगों का वर्णन कीजिए।

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सीनोजोइक महाकल्प (Coenozoic era) के तृतीयक कल्प (Tertiary period) के मायोसीन युग (Miocene epoch) में सम्भवत: ड्रायोपिथिकस जैसे सहपूर्वज (common ancestor) से मानव व कपि वंश का विकास अलग-अलग होना प्रारम्भ हुआ। रामापिथिकस (Ramapithecus) को केवल मानव वंश का पूर्वज माना जाता है। ये जीवाश्म भी मायोसीन युग के ही हैं।
इसके पश्चात् लगभग 80 लाख वर्ष का कोई जीवाश्म रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। अन्तिम प्लिओसीन (late Pliocene) से पूर्व प्लीस्टोसीन युग (early Pleistocene epoch) से प्राप्त जीवाश्मों को ऑस्ट्रेलोपिथिकस (Australopithecus) नाम दिया गया है। ऑस्ट्रेलोपिथिकस को आदिमानव या कपि मानव (primitive man or ape man) माना जाता है। आधुनिक मानव के वंश होमो (Homo) का विकास मध्य प्लीस्टोसीन युग में हुआ। आधुनिक मानव की जाति होमो सैपियन्स (Homo sapiens) का विकास आधुनिक युग (Recent epoch) में हुआ। मानव में विकास के दौरान हुए परिवर्तन (Changes during Evolution in Man) मानव में विकास के दौरान एक निश्चित दिशा में निम्नलिखित क्रमिक परिवर्तन हुए- ।.
(1) द्विपाद गमन (bipedal locomotion) हेतु टाँगें लम्बी और मजबूत हो गईं तथा हाथ छोटे हो गए। श्रोणिमेखला (pelvi girdle) चौड़ी तथा चिलमचीनुमा (bowl shaped) हो गई। द्विपाद गमन के कारण हाथ अन्य कार्यों के लिए स्वतन्त्र हो गए।
(2) दन्त विन्यास .U. आकार से अर्द्धचन्द्राकार .C. के आकार का हो गया। ऊपरी जबड़े में पाया जाने वाला दन्तावकाश (diastema) समाप्त हो गया। ये शाकाहारी से सर्वाहारी हो गए।
(3) चेहरे पर सामने नेत्रों के पास-पास स्थित होने के कारण त्रिविम दृष्टि (stereo scopic vision) का विकास हुआ, इसके फलस्वरूप ये नेत्रों का अधिक प्रयोग करने लगे तथा इनकी घ्राण शक्ति क्षीण हो गई। त्रिविम दृष्टि के कारण वस्तु की दूरी तथा उसके आकार-प्रकार का अनुमान लगाया जा सकता है।
(4) महारन्ध्र के खिसककर खोपड़ी के नीचे आ जाने से खोपड़ी कशेरुक दण्ड पर स्वतन्त्रतापूर्वक घूमने लगी।
(5) कपाल क्षमता में वृद्धि हो गई। इसके फलस्वरूप माथा (forehead) का विकास हुआ।
(6) भोजन को पकाकर खाने की प्रवृत्ति के विकास के कारण जबड़े की मांसपेशियों की शक्ति क्षीण होती गई, जबड़े हल्के हो गए।
(7) सीखने की क्षमता तथा अनुभवों को प्रसारित करने की क्षमता .वाणी के विकास. के फलस्वरूप विकसित हो गई।
(8) कशेरुक दण्ड में एक कटि वक्रता (lumber curve) .s. के आकार में होने से मनुष्य को खड़ी मुद्रा (erect posture) प्राप्त करने में सुविधा रही।
नियण्डरथल मानव के लक्षण .
(Characteristic Features of Neanderthal Man) में शीर्षक .नियण्डरथल मानव. देखिए।
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  18. मानव में होने वाले यौन संचारित रोगों का वर्णन कीजिए।

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  19. रसस्त्राव पर टिप्पणी कीजिए।

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