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BIOLOGY
ट्रांसजेनिक जन्तुओं के बारे में आप क्या ...

ट्रांसजेनिक जन्तुओं के बारे में आप क्या जानते हैं? मानव हित में उनके योगदान का आंकलन कीजिए।

लिखित उत्तर

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पारजीनी या ट्रांसजीतिक जन्तु (Transgenic animals)-आनुवंशिक अभियान्त्रिकी द्वारा विकसित जन्तु जिनके जीनोम में किसी अन्य जन्तु या पादप कोशिका के विजातीय वांछित लक्षण वाले जीन खण्ड, जीन या गुणसूत्र का निवेश होता है, ट्रांसजीनिक जन्तु कहलाते हैं। ट्रान्सजीनिक जीवों के माध्यम से अधिक मात्रा में दूष, मांस, अण्डे या ऊन देने वाले जन्तुओं के विकास को आण्विक खेती (molecular farming) कहते हैं।
आनुवंशिक अभियान्त्रिकी के माध्यम से चूहा, खरगोश, भेड़, बकरी, सूअर, गाय, भैंस, मछली आदि अनेक पारजीनी (ट्रांसजीनिक) जन्तु विकसित किए गए हैं। लेकिन इनका व्यावसायिक उत्पादन प्रारम्भ नहीं हो पाया है। अमेरिका ने 1995 में ट्रांसजीनिक चूहे का पेटेन्ट अधिकार प्राप्त कर लिया है।
मनुष्य के लिए ट्रांसजीनिक जन्तु निम्नलिखित कारणों से महत्त्वपूर्ण हैं-
1. सामान्य शरीर क्रिया व विकास (Normal body functions and development)-पारजीनी जन्तुओं का निर्माण विशेष रूप से किया जाता है। इनके शरीर के विकास व सामान्य कार्यों पर इनके जीन्स का नियन्त्रण होता है। शरीर क्रिया पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाता है, जैसे-इन्सुलिन की तरह विकास कारक का अध्ययना ।
2. रोगों का अध्ययन (Study of diseases)--अनेक पारजीनी जन्तु इस प्रकार निर्मित किए जाते हैं. ज़िनसे रोगों के विकास में जीन की भूमिका का पता चलता है। ये विशेष रूप से तैयार किए जाते है। इनका उपयोग मानव रोगों के लिए नमूने के रूप में किया जाता है, ताकि रोगों के नए उपचार वरीकों का अध्ययन किया जा सके। वर्तमान में मानव रोगों जैसे कैंसर, रूमेटॉयड संधिशोथ व अल्जाइमर हेतु पारजीनी नमूने उपलब्ध हैं। 4. टीका सुरक्षा (Vaccine protection) टीकों का मानव पर प्रयोग करने से पहले टीके की सरक्षा जाँच के लिए पारजीनी चूहों को विकसित किया गया है। पोलियो टीका की सुरक्षा जाँच के लिए पारजीनी चूहों का उपयोग किया जा चुका है। यदि उपर्युक्तं प्रयोग सफल व विश्वसनीय पाए गए तो टीका सुरक्षा जाँच के लिए बन्दर के स्थान पर पारजीनी चूहों का प्रयोग किया जा सकेगा।4. टीका सुरक्षा (Vaccine protection) टीकों का मानव पर प्रयोग करने से पहले टीके की सरक्षा जाँच के लिए पारजीनी चूहों को विकसित किया गया है। पोलियो टीका की सुरक्षा जाँच के लिए पारजीनी चूहों का उपयोग किया जा चुका है। यदि उपर्युक्तं प्रयोग सफल व विश्वसनीय पाए गए तो टीका सुरक्षा जाँच के लिए बन्दर के स्थान पर पारजीनी चूहों का प्रयोग किया जा सकेगा।
5. रासायनिक सुरक्षा परीक्षण (Chemical protection test)-यह आविषालुता सुरक्षा परीक्षण कहलाता है। यह वही विधि है जो औषधि आविषालुता परीक्षण हेतु प्रयोग में लायी जाती है। पारजीनी जन्तुओं में मिलने वाले कुछ जीन इसे आविषालु पदार्थों के प्रति अति संवेदनशील बनाते हैं, जबकि अपारजीनी जन्तुओं में ऐसा नहीं है। पारजीनी जन्तुओं को आविषालु पदार्थों के सम्पर्क में लाने के बाद पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। उपर्युक्त जन्तुओं में आविषालुता परीक्षण करने से कम समय में परिणाम प्राप्त हो जाता है।
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