Home
Class 12
BIOLOGY
मानव हित में पुनर्योगज डी०एन०ए० प्रौद्यो...

मानव हित में पुनर्योगज डी०एन०ए० प्रौद्योगिकी की चार उपयोगिताएँ बताइए।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

आनुवंशिक या जीनी अभियान्त्रिकी (Genetic Engineering)-इसके अन्तर्गत D.N.A. का कृत्रिम संश्लेषण, दो पृथक् D.N.A. खण्डों को जोड़ना, D.N.A. की मरम्मत, D.N.A. के कुछ न्यूक्लियोटाइड्स को पृथक् करके बदलना, इच्छित जीन को स्थापित करना आदि क्रियाएँ आती हैं। इस कारण इसे पुनःसंयोजी D.N.A. प्रौद्योगिकी (Recombinant D.N.A. technology) भी कहते हैं। आनुवंशिक इंजीनियरिंग का प्रयोग अनुसन्धान कार्य के लिए तथा अनेक व्यावसायिक उत्पादनों के लिए भी किया जा रहा है। आनुवंशिक इंजीनियरिंग की सहायता से मानव जीन्स की खोज, रोगों के कारणों की खोज की गई है। इससे रोगों के उपचार में भी सहायता मिल रही है।
आनुवंशिक इंजीनियरिंग के मुख्य अनुप्रयोग निम्नलिखित है
मानव जीन्स की मैपिंग (Mapping of human genes)-डी० एन० ए० पुनसंयोजन तकनीक द्वारा लगभग 1:00,000 से अधिक मानव जीन्स की गुणसूत्र पर स्थिति का निर्धारण किया जा चुका है।न्यूक्लियोटाइड क्रम में प्राकृतिक रूप से विभिन्नताएँ (random variations in nucleotide sequence) पायी जाती हैं। डी० एन० ए० अणु की विभिन्नताओं को रेस्ट्रिक्शन फ्रैग्मेंट लेंग्थ पॉलिमॉफिज्म (restriction fragiment length polymorphism या RFLP) कहते हैं। ऐसे हजारों रेस्ट्रिक्शन फ्रैंग्मेंट लेंग्थ पॉलिमॉर्फिज्म (RFLP) मानव जीनोम में खोजे जा चुके है। इनका विभिन्न व्यक्तियों में अध्ययन किया जा सकता है तथा इनकी वंशागति सामान्य मेण्डेलियन वंशागति (Mondelian inheritance) की भाँति होती है।
व्यक्तिगत जीन्स की पहचान (Identification of individual gene)-आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा व्यक्तिगत जीन्स की पहचान की गई और इस माध्यम से अनेक रोगों के जीन्स की खोज की गई है।
3. आनुवंशिक रोगों का पता लगाना (Diagnosing genetic diseases or disorders)- अनेक आनुवंशिक रोगों का गर्भ में ही ऐग्निओसेन्टेसिस (amniocentesis) तकनीक द्वारा पता लगाया जा सकता है। किन्तु डी० एन० ए० पुनर्सयोजन तकनीक द्वारा क्लोनकृत डी० एन० ए० क्रम (cloned D.N.A. sequence) के उपलब्ध होने से गर्भस्थ शिशु के पूरे जीनोटाइप का निरीक्षण किया जा सकता है। इस विधि द्वारा बिन्दु उत्परिवर्तन, विलोपन, प्रतिलोपन (inversion) आदि सभी उत्परिवर्तनों का पता लगाया जा सकता है। इस विधि का प्रयोग पश्चिमी देशों में गर्भस्थ शिशुओं में थैलेसीमिया, दात्र कोशिका अरक्तता, फिनाइलकीटोन्यूरिया आदि रोगों का पता लगाने के लिए किया जा रहा है।
4. व्यक्तिगत जीन्स को पृथक करना (Isolation of individual genes)-सन् 1970 व 1980 के बीच जीन्स को पृथक् करने की तकनीक विकसित की गई। इस काल में कुछ जीन्स पृथक किए गए, जो निम्नलिखित समूहों में वर्गीकृत किए जा सकते हैं
(i) राइबोसोमल आर० एन० ए० के जीन्स,
(ii) विशिष्ट प्रोटीन बनाने वाले जीन्स,
(iii) नियन्त्रण क्रिया वाले जीन्स, जैसे-रेगुलेटरी जीन (regulatory gene), प्रोमोटर जीन (promoter gene) आदि। पहली बार सन् 1965 में जीनोपस (Xenopus) के राइबोसोमल जीन्स को पृथक् किया गया था।
इस प्रकार चूजों में ओवलब्यूमिन (ovalbumin) के जीन, चूहे में ग्लोबिन तथा इम्यूनोग्लोबिन जीन, अनाजों व लेग्यूम्स में प्रोटीन संग्रह के जीन्स, बाजरे में ऐमाइलेज के जीन्स आदि को पृथक् किया जा चुका है।
5 .आनुवंशिक रोगों का उपचार (Treatment of hereditary diseases)---आनुवंशिक रोगों के उपचार के लिए पहले प्रयोगशाला के जन्तुओं में मानव रोग के जीन को प्रविष्ट कराया जाता है। फिर क्लोनिंग द्वारा ऐसे जन्तुओं की संख्या बढ़ाई जाती है। इसके बाद इन रोगों के उपचार के प्रयोग इन जन्तुओं पर किए जाते हैं।
6. डी० एन० ए० फिंगर प्रिंटिंग (D.N.A. finger printing)-डी० एन० ए० फिंगर प्रिंटिंग के लिए रेस्ट्रिक्शन फ्रैग्मेंट लेंग्थ पॉलिमॉर्फिज्म (RFLP) का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। प्रत्येक व्यक्ति के गुणसूत्रों में उसकी विशिष्ट RFLP होती है जिसके द्वारा उस व्यक्ति को रुधिर की एक बूंद, एक रोम या त्वचा के कुछ भाग द्वारा ही पहचाना जा सकता है।
7 व्यावसायिक उत्पाद (Commercial products)-आनुवंशिक इंजीनियरिंग तकनीक से तैयार अनेक उत्पाद आज बाजार में उपलब्ध हैं।
(i) इस तकनीक से निर्मित बाजार में उपलब्ध पहला उत्पाद था टमाटर आज जो टमाटर बाजार में उपलब्ध है, उसे फ्लेवर सेवर टमाटर (flavor saver tomato) कहते हैं। यह टमाटर बिना फ्रिज़ के भी बहुत दिनों तक खराब नहीं होता है।
(ii) मानव इन्सुलिन, मानव वृद्धि हॉर्मोन (human growth hormone), मानव इण्टरफेरॉन (interferon) का उत्पादन भी इस तकनीक से किया जा रहा है।
(iii) इस तकनीक द्वारा विभिन्न रोगों के टीकों का भी उत्पादन किया जा रहा है जैसे हेपैटाइटिस-बी, एण्टीरेबीज टीके . आदि इसी तकनीक से तैयार किए गए हैं।
(iv) जीवाणुओं से कीट प्रतिरोधक जीन निकाल कर पौधों में प्रविष्ट कराया जा रहा है। इससे व्यापारिक महत्त्व के पौधे को कीटों के आक्रमण से बचाया जा सकेगा।
(v) इसी प्रकार विषाणुरोधी तथा जीवाणुरोधी पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं। इस प्रकार आज प्रत्येक क्षेत्र में आनुवंशिक इंजीनियरिंग का उपयोग किया जा रहा है।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (लघु उत्तरीय प्रश्न Type -I)|22 Videos
  • जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (लघु उत्तरीय प्रश्न Type -II)|16 Videos
  • जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

    CHITRA PUBLICATION|Exercise NCERT जीव विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Biology Exemplar Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)|1 Videos
  • जीवों में जनन

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (बहुविकल्पीय प्रश्न)|17 Videos
  • जैव प्रौद्योगिकी- सिद्धान्त व प्रक्रम

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (बहुविकल्पीय प्रश्न )|14 Videos
CHITRA PUBLICATION-जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग -अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
  1. पारजीनि जन्तु क्या है ? इस तरह के पारजीनि जन्तुओं के चार लाभ लिखिए |

    Text Solution

    |

  2. ट्रांसजेनिक जन्तुओं के बारे में आप क्या जानते हैं? मानव हित में उनके य...

    Text Solution

    |

  3. टर्मनिटर बीज क्या है? इनके उत्पादन की विधि पर टिप्पणी कीजिए।

    Text Solution

    |

  4. जीनी अभियान्त्रिकी से आप क्या समझते हैं? मनुष्य को लाभ पहुंचाने के लिए...

    Text Solution

    |

  5. जीनी अभियान्त्रिकी क्या होती है ? इसे पुनर्योगज DNA प्रौद्योगिकी क्यों...

    Text Solution

    |

  6. औषधि के क्षेत्र में जीन अभियान्त्रिकी का उपयोग पर टिप्पणी लिखिए।

    Text Solution

    |

  7. आनुवंशिक अभियान्त्रिकी से आप क्या समझते हैं? चिकित्सा अथवा कृषि क्षेत्...

    Text Solution

    |

  8. जीनी अभियान्त्रिकी क्या होती है ? इसे पुनर्योगज DNA प्रौद्योगिकी क्यों...

    Text Solution

    |

  9. जिनी अभियांत्रिकी क्या होती है ? इसे पुनर्संयोगी डी oएनo एoप्रोधोगिकी...

    Text Solution

    |

  10. विषाणु के अनुप्रयोग पर निबंध लिखिए|

    Text Solution

    |

  11. पुनरसंयोजी DNA प्रौद्योगिकी क्या है ? आनुवंशिक अभियांत्रिकी के मानव हि...

    Text Solution

    |

  12. मानव हित में पुनर्योगज डी०एन०ए० प्रौद्योगिकी की चार उपयोगिताएँ बताइए।

    Text Solution

    |

  13. पुनर्योगज डी०एन०ए० क्या है? तकनीक की मदद से इन्सुलिन का उत्पादन कैसे क...

    Text Solution

    |

  14. डी०एन०ए० पुनर्योगज तकनीक द्वारा इन्सुलिन उत्पादन विधि की व्याख्या कीजि...

    Text Solution

    |

  15. मानव इन्सुलिन पर टिप्पणी लिखिए।

    Text Solution

    |

  16. जीनी अभियान्त्रिकी से आप क्या समझते हैं? रिकॉम्बीनेन्ट D.N.A. तकनीक की...

    Text Solution

    |

  17. जैव तकनीक क्या है? मानव हित में कृषि तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में जैव ...

    Text Solution

    |