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BIOLOGY
उर्वरक उद्योगों के उपोत्पाद कौन-से होते ...

उर्वरक उद्योगों के उपोत्पाद कौन-से होते हैं? पर्यावरण पर ये क्या प्रभाव डालते हैं?

लिखित उत्तर

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उर्वरकों का उत्पादन रासायनिक कारखानों में होता है। उर्वरक उत्पादन के समय उद्योगों से निकलने वाली हानिकारक गैसें, जैसे `SO_2` तथा NO वायु को प्रदूषित करती है। इसके फलस्वरूप अम्ल वर्षा होती है। प्रदूषित वायु में उपस्थित `SO_2` जलवाष्प में घुलकर `H_2 SO_4` बनाती है। यह श्वसन तन्त्र पर कुप्रभाव डालती है। श्वसन सम्बन्धी रोग हो जाते हैं। नाइट्रोजन के ऑक्साइड के कारण व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा की प्रकृति बदल जाती है। उवर्रकों के निरन्तर उपयोग से मृदा का गठन (texture) बदल जाता है। उर्वरकों की अधिकता से मृदा में उपस्थित सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। इससे पदार्थों का चक्रण प्रभावित होता है। उर्वरक तथा कीटनाशक रसायन पौधों के माध्यम से आहार श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं। इसके फलस्वरूप जैव आवर्धन . (biological magnification) होता जाता है। मनुष्य में इनकी मात्रा सर्वाधिक हो जाती है। निरन्तर उर्वरकों के प्रयोग से मृदा की उर्वरता कुप्रभावित होती जाती है। मृदा की जल धारण क्षमता कम हो जाती है। जीवधारियों के सूक्ष्मावास के प्रभावित होने से कृषि पद्धतियाँ प्रभावित होती हैं। अत: उर्वरकों के स्थान पर अब कृषक ह्यूमस (humus) या कम्पोस्ट खाद का उपयोग करके ऑर्गेनिक कृषि (organic agriculture) का प्रचलन बढ़ रहा है।
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