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Class 10
BIOLOGY
पोषक चक्र से क्या समझते हैं ? इसके प्रका...

पोषक चक्र से क्या समझते हैं ? इसके प्रकारों का वर्णन करें।

लिखित उत्तर

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पारितन्त्र (Ecosystem) किसी स्थान विशेष में पाए जाने वाले जैविक तथा अजैविक घटकों के पारस्परिक सम्बन्धों को सामूहिक रूप से पारितन्त्र कहते हैं। पारितन्त्र के दो प्रमुख घटक होते हैं- (A) सजीव या जैविक घटक, तथा (B) निर्जीव या अजैविक घटका (A) सजीव या जैविक घटक (Biotic Components) समस्त.जन्तु एवं पौधे जीवमण्डल में जैविक घटक के रूप में पाए जाते हैं। जैविक घटक को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है (i) उत्पादक (Producers)-हरे पौधे उत्पादक कहलाते हैं। हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड एवं पानी की सहायता से प्रकाश एवं पर्णहरिम की उपस्थिति में ग्लूकोज का निर्माण करते हैं। ग्लूकोज अन्य भोज्य पदार्थों (प्रोटीन, मण्ड व वसा) में परिवर्तित हो जाता है, जिसको जन्तु भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं।

(ii) उपभोक्ता (Consumers)-जन्तु पौधों द्वारा बनाए गए भोजन पर आश्रित रहते हैं, इसलिए जन्तुओं को उपभोक्ता कहते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज तत्व हमारे भोजन के अवयव हैं जो अनाज, बीज, फल, सब्जी आदि से प्राप्त होते हैं। ये सभी पौधों की ही देन हैं। कुछ जन्तु मांसाहारी होते हैं जो अपना भोजन शाकाहारी जन्तुओं का शिकार करके प्राप्त करते हैं। उपभोक्ता निम्न प्रकार के होते हैं (a) प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता-ये शाकाहारी होते हैं। इसके अन्तर्गत वे जन्तु आते हैं जो अपना भोजन सीधे हरे पौधों से प्राप्त करते हैं, जैसे-खरगोश, बकरी, टिड्डा, चूहा, हिरन, भैंस, गाय, हाथी आदि। . (b) द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता या मांसाहारी-ये मांसाहारी (carnivores) होते हैं। ये अपना. भोजन प्राथमिक उपभोक्ताओं या शाकाहारी प्राणियों का शिकार करके प्राप्त करते हैं, जैसे-सर्प, मेढक, गिरगिट, छिपकली, मैना पक्षी, लोमड़ी, भेड़िया, बिल्ली आदि। तृतीय श्रेणी के उपभोक्ताया तृतीयक उपभोक्ता. ये मांसाहारी होते हैं। ये अपना भोजन प्रायः द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ताओं से प्राप्त करते हैं, जैसे—सर्प मेढक का शिकार करते हैं, बड़ी मछलियाँ छोटी मछलियों का शिकार करती हैं, चिड़ियाँ मांसाहारी मछलियों का शिकार करती हैं। कुछ जन्तु एक से अधिक श्रेणी के उपभोक्ता हो सकते हैं (जैसे बिल्ली, मनुष्य आदि)। ये शाकाहारी तथा मांसाहारी पोषक स्तर से भोजन प्राप्त कर सकते हैं, अतः ये सर्वभक्षी (omnivore) कहलाते हैं। (iii) अपघटनकर्ता या अपघटक (Decomposers)--ये जीवमण्डल के सूक्ष्मजीव हैं, जैसे-जीवाणु व कवका ये उत्पादक तथा उपभोक्ताओं के मृत शरीर तथा जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल घुलनशील अकार्बनिक यौगिकों में अपघटित कर देते हैं। इन सूक्ष्मजीवों को अपघटक कहते हैं। ये विभिन्न कार्बनिक पदार्थों को उनके सरल अवयवों में तोड़ देते हैं। सरल पदार्थ पुन: भूमि में मिलकर पारितन्त्र के अजैव घटक का अंश बन जाते हैं। (B) निर्जीव या अजैविक घटक (Abiotic Components)
इसके अन्तर्गत निर्जीव वातावरण आता है, जो विभिन्न जैविक घटकों का नियन्त्रण करता है। अजैव घटक को निम्नलिखित तीन उपघटकों में विभाजित करते हैं
(i) अकार्बनिक घटक (Inorganic Components)-इसके अन्तर्गत पोटैशियम ल्सियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, लोहा, सल्फर आदि के लवण, जल तथा वायु की गैसें जैसे ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, अमोनिया आदि आती हैं। (ii) कार्बनिक घटक (Organic Components)—इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा आदि सम्मिलित हैं। ये मृतक जन्तुओं एवं पौधों के शरीर से प्राप्त होते हैं। अकार्बनिक एवं कार्बनिक भाग मिलकर निर्जीव वातावरण का निर्माण करते हैं। (ii) भौतिक घटक (Physical Components)—इसमें विभिन्न प्रकार के जलवायवीय कारक जैसे वायु, प्रकाश, ताप, विद्युत आदि आते हैं।
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