श्वसन-ऑक्सी तथा अनॉक्सी श्वसन
श्वसन का अर्थ है जीवित कोशिकाओं में भोज्य पदार्थ में उपस्थित रासायनिक ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में परिवर्तित करना जिससे ऊर्जा का उपयोग जैविक क्रियाओं में किया जा सके। सामान्यतः इस कार्य के लिए कार्बोहाइड्रेट्स का उपयोग किया जाता है कार्बोहाइड्रेट्स के जैव-रासायनिक ऑक्सीकरण के फलस्वरूप मुक्त ऊर्जा को ADP अणुओं में उच्च ऊर्जा बन्धों के द्वारा, एक और फॉस्फेट मूलक जोड़कर ATP के रूप में संचित किया जाता है। यह क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में कोशिका के माइटोकॉण्ड्रिया में होती है। यह क्रिया ऑक्सी श्वसन या वायवीय श्वसन (aerobic respiration) कहलाती है।. ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बोहाइड्रेट का अंपूर्ण ऑक्सीकरण होने से कम मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। इस प्रकार का श्वसन जिसमें ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है, अनॉक्सी (aerobic) या अवायवीय (anaerobic) श्वसन कहलाता है
श्वसन की परिभाषा
"श्वसन जीवित कोशिकाओं में होने वाली जैव-रासायनिक ऑक्सीकरण क्रिया है, इसमें विभिन्न जटिल कार्बनिक पदार्थों (सुक्रोस, स्टार्च, शर्करा, वसा, प्रोटीन, कार्बनिक अम्ल आदि) के ऑक्सीकरण से मुक्त ऊर्जा विभिन्न उपापचयी क्रियाओं के लिए ATP के रूप में संचित की जाती है। इस क्रिया में `CO_(2)` तथा जल विमोचित होता है।" यह क्रिया एन्जाइम्स की सहायता से सामान्य शरीर ताप पर सम्पन्न होती है
`C_(6)H_(12)O_(6)+6O_(2)rarr6CO_(2)uarr+6H_(2)O+673` keal
ऑक्सी तथा अनॉक्सी श्वसन की प्रारम्भिक क्रियाएँ एक ही प्रकार की होती हैं। इन प्रारम्भिक क्रियाओं में ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है। इन क्रियाओं में ग्लूकोस के विघटन से पाइरुविक अम्ल (pyruvic acid) बनता है। यह क्रिया ग्लाइकोलिसिस (glycolysis) या ई.एम.पी.पथ (EMP Pathway) कहलाती है
पाइरुविक अम्ल का आगे ऑक्सीकरण ऑक्सीजन की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर निर्भर करता है। यदि-(i) ऑक्सीजन उपस्थित है तो ऑक्सी श्वसन होगा अर्थात् पाइरुविक अम्ल के पूर्ण ऑक्सीकरण से जल व कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं और ऊर्जा (673 kcal) मुक्त होती है। यह क्रिया एक चक्र के द्वारा होती है, इसे ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र (Tricarboxylic Acid Cycle) अथवा क्रेब्स चक्र (Krebs Cycle) कहा जाता है। (ii) यदि ऑक्सीजन अनुपस्थित है तो अनॉक्सी श्वसन होगा। , इसके फलस्वरूप प्रायः एथिल ऐल्कोहॉल (ethyl alcohol) तथा कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं और 21 kcal ऊर्जा (2ATP) मुक्त होती है
ऑक्सी श्वसन
इस प्रक्रिया में तीन प्रमुख भाग होते हैं
I. ग्लाइकोलिसिस अथवा ई.एम.पी. पथ (Glycolysis or EMP Pathway)
II. ऐसीटिल कोएन्जाइम-A का निर्माण (Formation of Acetyl Co-A).
III. क्रेब्स चक्र या ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र (Krebs Cycle or Tricarboxylic Acid Cycle) या सिट्रिक अम्ल चक्र (Citric Acid Cycle)
1.ग्लाइकोलिसिस या ई.एम.पी. पथ (Glycolysis or EMP Pathway)
इसके सामान्य पदों का अध्ययन जर्मनी के तीन वैज्ञानिकों-एम्बडेन (Embden), मेयरहॉफ (Meyerhoff) तथा पारनास (Parnas) ने किया, उन्हीं के नाम पर इसे ई.एम.पी. पथ भी कहते हैं। ग्लाइकोलिसिस की सभी क्रियाएँ कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में सम्पन्न होती हैं। इन क्रियाओं के फलस्वरूप एक ग्लूकोस अणु (6 कार्बन यौगिक) विघटित होकर पाइरुविक अम्ल (3 कार्बन यौगिक) के दो अणु बनाता है। इन प्रक्रियाओं में उत्पन्न ऊर्जा से चार ATP अणुओं का निर्माण होता है, किन्तु दो ATP अणु इन अभिक्रियाओं में प्रयुक्त हो जाते हैं। अत: कुल उपलब्धि केवल दो ATP अणुओं की ही होती है। इन अभिक्रियाओं में मुक्त `2H^(+)` आयन हाइड्रोजनग्राही (hydrogen acceptor), NAD के साथ अनुबन्धित होकर NAD.2H बनाते हैं। ये अभिक्रियाएँ एन्जाइम्स तथा सहएन्जाइम्स की उपस्थिति में श्रृंखलाबद्ध रूप में घटित होती हैं
पद (i) ग्लूकोस हेक्सोकाइनेज एन्जाइम (hexokinase) को उपस्थिति में पहले एक ATP अणु के साथ क्रिया करके ग्लूकोस-6-फॉस्फेट बनाता है, जो बाद में आन्तरिक परिवर्तन के द्वारा फ्रक्टोस-6-फॉस्फेट में बदल जाता है। फ्रक्टोस-6-फॉस्फेट एक और अणु ATP से क्रिया करके.फ्रक्टोस-1, 6-बाइफॉस्फेट बना लेता है
`"Glucose"+ATPunderset(mg^(++))overset("Hexokinase")rarr`Glucose-6-phosphate+ ADP
Glucose-6-phosphate`overset("Phosphofructokinase")hArr`Fructose-6-phosphate
Fructose-6-phosphate + ATP`overset("Phosphohexoisomerase")underset(mg^(++))rarr`Fructose-1, 6-biphosphate
पद II—इस पद में फॉस्फेटयुक्त शर्करा (fructose-1,6-biphosphate) के विदलन से 3 कार्बन वाले दो यौगिकों, 3-फॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड (3-phosphoglyceraldehyde) तथा डाइहाइड्रॉक्सी-ऐसीटोन फॉस्फेट (dihydroxyacetone phosphate) के एक-एक अणु बनते हैं। ये दोनों यौगिक एक-दूसरे में ट्राइओस आइसोमरेज एन्जाइम द्वारा परिवर्तित होते रहते हैं। 3-फॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड के दो अणु फॉस्फोरिक अम्लं `(H_(3)PO_(4))` से अभिक्रिया करके 1, 3-डाइफॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड बनाते हैं, जो स्वयं NAD सह-एन्जाइम को दो-दो `H^(+)` आयन तथा इलेक्ट्रॉन्स देकर ऑक्सीकृत हो जाते हैं और 1, 3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल का निर्माण होता है
(i) `underset(mol)"Fructose"-1,6-"diphosphate"overset("Aldolase")rarr"3 phosphoglyceraldehyde+Dihydroxyacetone" "
" "phosphate"`
(ii) `underset(2mol)(3"phosphoglyceraldehyde")+underset(2mol)(H_(3)PO_(4))underset("enzymes")hArrunderset(2mol)(1,3-"diphosphoglyceraldehyde")
(III) underset(2mol)(1,3-"diphosphoglyceraldehyde"+2NAD)overset("Dehydrogenase")hArrunderset(2mol)("1, 3-"diphosphoglyceric" "acid" `
1, 3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल के दोनों अणुओं से एक फॉस्फेट समूह निकलकर. ADP से मिलकर एक-एक ATP अणु तथा 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (3-phosphoglyceric acid) बनता है
`underset(2mol)(1,.3-"diphosphoglyceric" "acid"+2ADP)overset("Phosphoglyceric acid kinase")underset(mg^(++))rarrunderset(2mol)(3"phosphoglyceric" "acid" +2ATP`
3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (3-phosphoglyceric acid), फॉस्फोग्लिसरोम्यूटेस (phosphoglyceromutase) एन्जाइम द्वारा 2-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल बनाता है
2-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल से जल के 2 अणु-निकलते हैं, इसके फलस्वरूप 2-फॉस्फोइनोल पाइरुविक अम्ल बनता है
`underset(2mol)(2-"phosphoglyceric" "acid")overset("Enolase")hArrunderset(2mol)(2-"phosphoenolpyruvic" "acid"+2H_(2)O`
2-फॉस्फोइनोल पाइरुविक अम्ल से एक `PO_(4)` समूह निकलकर पाइरुविक अम्ल बनाता है
`underset(2mol)(2-"phosphoenol" "pyruvic" "acid"+2ADP)overset("Pyruvic acid")underset("Kinase")rarrunderset(2mol)("Pyruvic" "acid"+2ATP`
प्रत्येक ग्लूकोस अणु से पाइरुविक अम्ल `(CH_(3)COCOOH)`के 2 अणुओं का निर्माण ग्लाइकोलिसिस क्रिया का अन्तिम चरण है
II. ऐसीटिल कोएन्जाइम-ए का निर्माण
ग्लाइकोलिसिस, में बना पाइरुविक अम्ल ऐसीटिल कोएन्जाइम-ए के रूप में केब्स चक्र में प्रवेश करता है। पाइरुविक अम्ल, कोएन्जाइम-A तथा NAD से क्रिया करके ऐसीटिल कोएन्जाइम-A का निर्माण करता है। इस क्रिया में `CO_(2)` तथा NAD.2H का एक अणु बनता है। इस क्रिया में NAD.2H से हाइड्रोजन आयन स्थानान्तरण के समय मुक्त इलेक्ट्रॉन से 6 ATP अणु प्राप्त होते हैं
Pyruvic acid+Co-A+NAD`overset("Dehydrogenase")rarr"Acetyl" "Co-A+NAD".2H+CO_(2)uarr`
III. क्रेन्स चक्र या ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र
ग्लाइकोलिसिस के द्वारा बनने वाले (एक अणु ग्लूकोस से) दो पाइरुविक अम्ल के अणुओं का ऑक्सीकरण, ऑक्सीजन की उपस्थिति में, क्रमबद्ध तथा चक्र में होने वाली अनेक अभिक्रियाओं के द्वारा होता है। इन अभिक्रियाओं में अनेक एन्जाइम्स तथा सहएन्जाइम्स (Coenzymes) भाग लेते हैं। ये सभी अभिक्रियाएँ, माइटोकॉण्ड्रिया में होती हैं। यहाँ सभी प्रकार के आवश्यक एन्जाइम्स व सहएन्जाइम के अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन अभिगमन तन्त्र (Electron Transport Systems = ETS) के इलेक्ट्रॉनग्राही भी होते हैं, जो निष्कासित ऊर्जा को ATP निर्माण के लिए अनुबन्धित करने में आधार का काम करते हैं। ये अभिक्रियाएँ क्रेब्स चक्र (Krebs cycle) या ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र (Tricarboxylic acid cycle) द्वारा पूर्ण होती हैं
ऐसीटिल कोएन्जाइम-A ऑक्सैलोऐसीटिक अम्ल (oxaloacetic acid) से क्रिया करके 6 कार्बन यौगिक सिट्रिक अम्ल (citric acid) बनाता है। सिट्रिक अम्ल का क्रमशः निम्नीकरण होता है और अन्त में पुन: ऑक्सैलोऐसीटिक अम्ल प्राप्त हो जाता है। क्रेब्स चक्र में दो अणु `CO_(2)` के मुक्त होते हैं, चार स्थानों पर दो हाइड्रोजन परमाणु `(2H^(+)` मुक्त होते हैं, जिन्हें हाइड्रोजनग्राही NAD या FAD ग्रहण करते हैं
ग्लूकोस के जैव-रासायनिक ऑक्सीकरण का सारांश
1. ग्लाइकोलिसिस (Glycolysis) `"Glucose"+2NADrarr2"Pyruvic" "acid"+2NAD.2H+.........8ATP`
2. ऐसीटिलकोएन्जाइम-A का निर्माण `2”Pyruvic” “Acid”+2Co-A+ 2NADrarr2”AcetyI”-Co-A+ 2NAD.2H+2CO_(2)uarr+......6ATP`
3. क्रेब्स चक्रः 2 Acetyl Co-A+`6H_(2)O`+3 NAD + FAD + ADP+ iP `rarr`2 Co-A+3NAD.2H+FAD.2H+ATP +`4CO_(2)uarr`+....24ATP
क्रेब्स चक्र अत्यन्त महत्त्वपूर्ण क्रिया है, जो ऑक्सी श्वसन को ATP अणु बनाकर पूर्ण दक्ष क्रिया बनाने के अतिरिक्त अनेक महत्त्वपूर्ण माध्यमिक उत्पाद बनाता है, जो कई प्रकार के पदार्थों जैसे वसा, प्रोटीन्स, विटामिन्स आदि बनाने के लिए आवश्यक हैं