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Class 9
PHYSICS
जब हम किसी सरल लोलक के गोलक को एक ओर ले ...

जब हम किसी सरल लोलक के गोलक को एक ओर ले जाकर छोड़ते हैं तो यह दोलन करने लगता है। इसमें होने वाले कर्जा परिवर्तनों की चर्चा करते हुए ऊर्जा संरक्षण के नियम को स्पष्ट कीजिए। गोलक कुछ समय पश्चात् विरामअवस्था में क्यों आ जाता है? अन्ततः इसकी ऊर्जा का क्या होता है? क्या यह कर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन है?

लिखित उत्तर

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सरल लोलक के दोलनों में ऊर्जा का रूपान्तरण
(Energy Transformation iņ Oscillations of a Simple Pendulum)
माना प्रारम्भ में गोलक अपनी माध्य अवस्था में विराम की स्थिति में होता है। इस समय इसकी गतिज ऊर्जा शून्य होती है। इस स्थिति में हम इसकी स्थितिज ऊर्जा को भी शून्य मान लेते हैं।
जब गोलक को माध्य अवस्था से एक और को ले जाते हैं तो इसकी ऊँचाई बढ़ने लगती है और इस क्रिया में हमें गुरुत्वीय बल के विरुद्ध कुछ कार्य करना पड़ता है। यह कार्य इसकी स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता जाता है। इस प्रकार माध्य अवस्था से अधिकतम विस्थापन की स्थिति में जब हम गोलक को छोड़ते हैं, तब उस समय गोलक की स्थितिज ऊर्जा अधिकतम तथा गतिज ऊर्जा शून्य होती है।
छोड़ने पर गोलक धीरे-धीरे माध्य स्थिति की ओर लौटता है, इससे गोलक की स्थितिज ऊर्जा घटने लगती है, परन्तु गतिज ऊर्जा बढ़ने लगती है। चूंकि गोलक वायु में होकर गति करता है। अत: गोलक की ऊर्जा का कुछ भाग वायु के घर्षण के विरुद्ध कार्य करने में व्यय हो जाता है। जब गोलक माध्य अवस्था से गुजरता है तो उसका वेग अधिकतम होता है। अतः गतिज ऊर्जा अधिकतम तथा स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है।
गोलक अपने जड़त्व के कारण माध्य. अवस्था में नहीं रुक पाता और .दूसरी ओर निकल जाता है। इससे गोलक की ऊँचाई बढ़ने लगती है। अतः . उसको स्थितिज ऊर्जा बढ़ने लगती है, परन्तु गतिज ऊर्जा घटने लगती है। ऊर्जा का कुछ भागावायु के अणुओं को मिल जाता है। अन्त में गोलक विराम में आ जाता है। इस स्थिति में उसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम तथा गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है। गोलक. यहाँ रुका नहीं रहता, अपितु पुनः माध्य अवस्था की ओर लौटने लगता है। प्रत्येक स्थिति में गोलक की स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा तथा वायु के अणुओं को दी गई ऊर्जा का, योग नियत बना रहता है। इस प्रकार सरल गतिज ऊर्जा अधिकतम " लोलक के दोलनों में कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है।

गोलक का माध्य अवस्था के एक ओर का महत्तम विस्थापन (आयाम) गोलक की कुल कर्जा पर निर्भर करता है। गोलक .द्वारा वायु के अणुओं को दी गई ऊर्जा पुनः गोलक को वापस नहीं मिल पाती। इससे गोलक की कुल ऊर्जा लगातार घटती जाती है, अतः गोलक के दोलनों का आयाम भी घटता जाता है। जब गोलक अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा वायु के अणुओं को दे देता है तो उसकी कुल ऊर्जा शून्य हो जाती है और वह सदैव के लिए विराम में आ जाता है।
अन्ततः गोलक की ऊर्जा वायु के अणुओं को चली जाती है।
नहीं, यह ऊर्जा संरक्षण के नियम का उल्लंघन नहीं है।
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