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उपयुक्त चित्रों की सहायता से पादपों में ...

उपयुक्त चित्रों की सहायता से पादपों में खाद्य स्थानान्तरण की क्रिया समझाइए।

लिखित उत्तर

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खाद्य स्थानान्तरण (Translocation of Food)
खाद्य पदार्थ पत्ती में बनते हैं तथा उनका स्थानान्तरण फ्लोएम ऊतक की चालनी नलिकाओं (sieve tubes) द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर होता है। स्रोत से संचय के स्थान पर खाद्य पदार्थ के पहुँचने को खाद्य स्थानान्तरण (translocation of food) कहते हैं। इसको स्पष्ट करने के लिए निम्नलिखित परिकल्पनाएँ प्रस्तावित की गई हैं -
1. विसरण परिकल्पना (Diffusion Hypothesis)-इसके अनुसार कार्बनिक पदार्थों का स्थानान्तरण विसरण क्रिया के द्वारा होता है। स्त्रोत से संचयी अंगों में भोज्य पदार्थों का सान्द्रण अधिक होता है। संचयी अंगों में विलेयशील भोज्य पदार्थ अविलेय अवस्था में बदल जाते हैं जिससे संचयी अंगों में इसका सान्द्रण कम हो जाता है। खाद्य का स्थानान्तरण अधिक सान्द्रता से कम सान्द्रता की ओर होता है। इस परिकल्पना को उपयुक्त नहीं माना गया, क्योंकि खाद्य पदार्थों का स्थानान्तरण विसरण गति से अधिक तीव्र गति से होता हैं। विसरण की क्रिया पूर्णतः एक भौतिक क्रिया होती है, जबकि स्थानान्तरण की क्रिया फ्लोएम की उपापचयी क्रियाओं पर निर्भर करती है।
2. जीवद्रव्य प्रवाह परिकल्पना (Protoplasmic Streaming Hypothesis)-इस सिद्धान्त को ह्यूगो डी वीज (Hugo De Vries, 1885) ने प्रस्तुत किया था। इसके पश्चात् कर्टिस (Curtis, 1929) ने अनुमोदित किया। यह परिकल्पना जीवद्रव्य के कोशिकाओं में प्रवाह पर आधारित है। चालनी नलिकाओं में जीवद्रव्य के प्रवाहित होते रहने के कारण उसमें घुलित भोज्य पदार्थ के अणु भी प्रवाहित होते रहते हैं। जीवद्रव्य चालनी नलिकाओं में उपस्थित चालनी पट्टिकाओं के छिद्रों में होकर एक कोशिका से दूसरी कोशिका में पहुँचता है अतः पत्तियों से जड़ों तक इस प्रकार प्रवाह में ये अणु पहुँच जाते हैं। इस परिकल्पना के विरुद्ध प्रमुख आपत्ति इसका प्रयोगात्मक स्वरूप न होना है। जीवद्रव्य की मात्रा तथा सक्रियता नवीन चालनी नलिकाओं में अधिक होती है, जबकि इसके विपरीत खाद्य स्थानान्तरण की क्रिया नवीन नलिकाओं में कम गति से होती है।

3. मुंच की परिकल्पना (Munch Hypothesis)-मुंच (Munch, 1930) ने फ्लोएम द्वारा भोज्य पदार्थों के स्थानान्तरण के सम्बन्ध में यह बताया कि यह क्रिया अधिक सान्द्रता वाले स्थान से कम सान्द्रता वाले स्थानों की ओर होती है। मीसोफिल कोशिकाओं में निरन्तर भोज्य पदार्थों के बनने के कारण परासरण दाब अधिक बना रहता है। जड़ों में व अन्य स्थानों में इन पदार्थों के उपयोग में आते रहने अथवा अघुलनशील रूप में संचित हो जाने से सान्द्रता कम हो जाती है। अत: मीसोफिल कोशिकाओं से भोज्य पदार्थों का स्थानान्तरण, परासरण-दाब के कारण फ्लोएम के माध्यम से होता रहता है। इस परिकल्पना को निम्नलिखित प्रयोग द्वारा समझाया जा सकता है -
दो अर्द्धपारदर्शी झिल्ली से बने परासरणदर्शी लेते हैं।.परासरणदर्शी बनाने के लिए एक नली के सिरे पर अण्डे की झिल्ली या कोई अन्य अर्द्धपारगम्य झिल्ली बाँध देते हैं। दोनों परासरणदर्शियों को एक नली .C. द्वारा जोड़ते हैं। परासरणदर्शी .A. में सान्द्र शर्करा विलयन है तथा .B. में सादा पानी लेते हैं। दोनों परासरणदर्शी को जल से भरे पात्र में रखते हैं। दोनों पात्र भी एक छोटी नली से जुड़े रहते हैं ।
.A. में अत्यधिक परांसरण दाब के कारण अधिक स्फीति दाब पैदा होता है। .A. का विलयन अविरल धारा (mass flow) के रूप में .B. की ओर प्रवाहित होता है। यह प्रवाह क्रम चलता रहता है जब तक कि दोनों ओर शर्करा भी सान्द्रता बराबर नहीं हो .जाती है। .B. में आकर विलयन से जल पात्र में जाएगा तथा .A. में जल पात्र से प्रवेश करेगा।
यदि .A. में निरन्तर शर्करा को कम न होने दें तथा .B. में आई हुई शर्करा को हटाया जाता रहे तो यह क्रिया सतत व तेज गति से होती रहेगी।

.A. को पत्तियों की मीसोफिल कोशिकाएँ मान लें जहाँ शर्करा निर्मित होती है तथा परासरण दाब निरन्तर बना रहता है तथा .B. को जड़ व अन्य भाग की कोशिकाएँ मानें जहाँ इस शर्करा का उपयोग अथवा संचयन होता है तो .C. नली चालनी नलिका तथा पात्र जाइलम समान होंगे। मुंच की परिकल्पना के अनुसार जल में घुले भोज्य पदार्थों की एक अविरल धारा मात्रा या दाब प्रवाह के रूप में फ्लोएम में प्रवाहित होती रहती है। मुंच. की परिकल्पना विभिन्न दिशाओं में एक साथ भोज्य पदार्थों के स्थानान्तरण के सम्बन्ध में कुछ नहीं कहती है। ये ही इस परिकल्पना की कमजोरी है। सामान्यतया खाद्य पदार्थों का स्थानान्तरण पत्तियों से जड़ की ओर एवं पार्श्व दिशाओं में होता रहता है। फल निर्माण के समय खाद्य पदार्थों का स्थानान्तरण ऊपर अर्थात् फलों की ओर होता है। बीजों के अंकुरित होते समय बीजों में संचित भोज्य पदार्थों का स्थानान्तरण प्रांकुर और मूलांकुर दोनों ओर होता है।
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